Wednesday, March 18, 2026

नए लेबर कोड्स में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को 1 साल में ग्रेच्युटी देने का प्रावधान है, पर गेंद राज्यों के पाले में है.

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 सरकार ने नए लेबर कोड्स में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब उन्हें एक साल की सेवा पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी मिलने का प्रावधान है. इससे पहले, ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल लगातार सेवा आवश्यक थी. नए नियम का मकसद बदलते जॉब मार्केट में कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को जल्दी सोशल सिक्योरिटी देना था.

नियम अभी तक लागू क्यों नहीं हुआ
हालांकि नया नियम घोषित किया गया है, लेकिन जमीन पर यह लागू नहीं हुआ. कारण है कि लेबर कानून भारत में कॉन्करेंट लिस्ट में आते हैं. यानी केंद्र सरकार कानून बना सकती है, लेकिन राज्य सरकारों को अपने स्तर पर नियम नोटिफाई करना जरूरी है. जब तक राज्य नियम जारी नहीं करते, कंपनियों पर नया नियम लागू नहीं होगा.

कंपनियों का रुख
अभी ज्यादातर कंपनियां पुराने नियमों के तहत ही ग्रेच्युटी दे रही हैं. पांच साल की लगातार सेवा वाला नियम अभी भी मान्य है. फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों की बड़ी संख्या इस अवधि तक नहीं पहुँच पाती, जिससे वे ग्रेच्युटी से बाहर रह जाते हैं. कंपनियां नए प्रावधान को लागू करने से बच रही हैं ताकि कानूनी विवाद या भविष्य की देनदारी से बचा जा सके.

सरकार की स्थिति
लेबर मंत्रालय ने कहा है कि नए कोड्स के तहत फिक्स्ड टर्म कर्मचारी एक साल पूरी करने पर ग्रेच्युटी का हकदार हैं. लेकिन राज्य सरकारों के नियम जारी न होने की वजह से यह अभी नीति स्तर तक ही सीमित है.

बाकी सुधार भी अटके
सिर्फ ग्रेच्युटी ही नहीं, नए लेबर कोड्स से जुड़े कई सुधार जैसे सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी, वर्किंग ऑवर्स और हायरिंग-छंटनी के नियम भी राज्य नियमों पर निर्भर हैं.

राज्यों की सुस्ती के कारण
राज्य सरकारें राजनीतिक और सामाजिक कारणों से नियमों को जल्दी लागू नहीं कर रही हैं. ट्रेड यूनियनों और उद्योग जगत की चिंताओं के कारण कुछ राज्यों में प्रक्रिया लंबी चल रही है.

कर्मचारियों के लिए असर
कर्मचारियों के लिए साफ है कि अभी एक साल में ग्रेच्युटी मिलने का नियम लागू नहीं. जब तक राज्य सरकारें नए लेबर रूल्स को नोटिफाई नहीं करतीं, पांच साल की सेवा वाला पुराना नियम ही जारी रहेगा.

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