रांचीः जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission 2.0) के तहत झारखंड सरकार और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच आज MoU पर हस्ताक्षर किया गया. इस समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की. समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित हुए. कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद के बीच अभिवादन आदान-प्रदान से हुई.
इस मौके पर जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री वी सोमन्ना, झारखंड सरकार के पेयजल मंत्री योगेंद्र प्रसाद सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
सीएम हेमंत सोरेन ने ऑनलाइन किया संबोधित
इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2019-20 से जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में कुल ₹24,635 करोड़ की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है. मल्टी विलेज स्कीम (MVS) और सिंगल विलेज स्कीम (SVS) पर विशेष जोर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अब तक केंद्र से कोई पर्याप्त धनराशि जारी नहीं की गई है.
इस मौके पर राज्य सरकार द्वारा स्वीकार्य केंद्रांश राशि शीघ्र जारी करने की मांग की गई साथ ही बताया गया कि अभी तक 55% परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि पूर्ण कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा केवल 46% अनुदान ही उपलब्ध कराया गया है. केंद्र सरकार से लगभग ₹6,500 करोड़ की लंबित सहायता मांगी गई. राज्य सरकार के द्वारा योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की संस्थाओं से NOC देने में समय पर सहयोग की आवश्यकता बताई गई. साथ ही राज्य स्तर पर सिंगल विलेज स्कीम (SVS) के सतत संचालन पर जोर दिया गया.
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि रेट्रोफिटिंग और नियमित संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी. इस प्रयोजन के लिए 16वें वित्त आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थानों (PRI) को दिए गए अनुदान का उपयोग किया जा सकता है. उन्होंने इस मौके पर महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि झारखंड के लिए विशेष रूप से ₹2,500 करोड़ की राशि आवंटित की गई है. राज्य को JJM 2.0 के मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा और दिशा-निर्देशों के अनुसार धनराशि जारी कराने का अनुरोध किया गया. इस बैठक में 1,400 करोड़ की अनुचित लागत वाले ओवरसाइज्ड घटक की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए.


