Tuesday, February 10, 2026

‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले जैंतगढ़ और वैतरणी के तटीय क्षेत्रों के किसानों के लिए पिछले तीन सालों से धान खरीद केंद्र बंद है.

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जैंतगढ़ और वैतरणी के किसानों के सामने बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हुई है. सरकारी दरों पर उनके धान की खरीद नहीं होने से उन्हें बिचौलिए को अपनी फसल बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

Chaibasa: ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले जैंतगढ़ और वैतरणी के तटीय क्षेत्रों के किसानों के लिए पिछले तीन सालों से धान खरीद केंद्र बंद है. इस साल विभाग ने जैंतगढ़ के किसानों के लिए 20 से 25 किमी दूर बसीरा गांव में केंद्र बनाया है, लेकिन वहां भी पिछले एक माह से ताला लटका हुआ है. धान अधिप्राप्ति केंद्र के सचिव सत्येंद्र हेस्सा ने बताया कि केंद्र को 25 हजार क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य मिला है. अब तक 667 किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से मात्र 21 किसानों का धान लिया जा सका है. अभी भी 646 किसान अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि मात्र 962.51 क्विंटल धान की खरीद के बाद ही गोदाम पूरी तरह भर गया है. डेढ़ माह बीतने के बावजूद विभाग ने धान का उठाव नहीं किया है, जिसके कारण गोदाम में रखे धान को अब चूहे खा रहे हैं.

खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेच रहे किसान

झामुमो के जिला सह सचिव संदेश सरदार ने कहा कि सरकार ने किसानों के हित में धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल रखा है. पदाधिकारियों की उदासीनता और मिल मालिकों की मनमानी के कारण किसान इस योजना के लाभ से वंचित हैं. किसान मजबूरी में खुले बाजार में 13-14 रु. प्रति किलो (1300-1400 रुपये क्विंटल) धान बेचने को विवश हैं.

पर्व-त्योहारों की खुशियां पड़ी फीकी

क्षेत्र के किसान धान बेचकर ही अपने त्योहारों के खर्च का इंतजाम करते हैं. संदेश सरदार ने बताया कि मकर संक्रांति बीत गयी और अब ‘मागे पर्व’ चल रहा है, लेकिन किसानों के पास पैसे नहीं हैं. किसानों का घर में रखा धान भी खराब हो रहा है. उन्होंने मांग की है कि बसीरा केंद्र से तुरंत धान का उठाव कराया जाए और जैंतगढ़ में भी धान की खरीदारी शुरू की जाए ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके.

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