Friday, October 16, 2026

धनसार में एक लाख पौधों के बीच विराजमान मां दुर्गा, पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश.

Share

धनबाद: कोयलांचल में दुर्गा पूजा की रौनक के बीच धनबाद के धनसार का पूजा पंडाल अपनी अनूठी थीम को लेकर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां मां दुर्गा का दरबार फूलों की पारंपरिक सजावट के बजाय हरियाली के बीच सजाया गया है। पंडाल में एक लाख पौधों के इस्तेमाल का दावा किया गया है। इसकी सजावट के जरिए पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के महत्व का संदेश दिया जा रहा है।

पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को हरियाली के बीच मां दुर्गा के दर्शन होते हैं। पेड़-पौधों से सजे वातावरण में प्रकृति और आस्था का सुंदर मेल देखने को मिलता है। समिति ने इस थीम के माध्यम से लोगों को पौधे लगाने और पर्यावरण की रक्षा करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है।

भगवान जगन्नाथ के स्वरूप में बनाया गया पंडाल

धनसार दुर्गापूजा समिति ने इस बार पंडाल के बाहरी हिस्से को भगवान जगन्नाथ के चेहरे का आकार दिया है। इसके निर्माण में करीब 40 हजार छोटे-छोटे बांस के टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। पंडाल की विशेष बनावट और प्राकृतिक सजावट इसे अलग पहचान दे रही है।

पंडाल के अंदर तीन अलग-अलग स्तरों पर पर्यावरण और सनातन संस्कृति से जुड़े संदेशों को दर्शाया गया है। पहले हिस्से में पौधों की सजावट के साथ पर्यावरण संरक्षण और झरिया क्षेत्र में आग की गंभीर समस्या को प्रदर्शित किया गया है। इसके जरिए कोयलांचल की पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है।

कृत्रिम बरगद से वन देवी के प्रकट होने का दृश्य

पंडाल के दूसरे हिस्से में एक कृत्रिम बरगद के पेड़ को वन देवी के स्वरूप से जोड़ा गया है। मिट्टी और पेड़ की जड़ों के बीच से वन देवी के प्रकट होने का दृश्य तैयार किया गया है। यह प्रस्तुति प्रकृति, जीवन और पर्यावरण के आपसी संबंध को दर्शाती है।

समिति ने इस सजावट के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया है कि पेड़-पौधे केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

हरियाली के बीच मां दुर्गा अपने परिवार के साथ विराजमान

पंडाल के तीसरे और अंतिम हिस्से में मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं। मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाओं को भी पेड़-पौधों और पत्तियों के बीच सजाया गया है।

मां दुर्गा की प्रतिमा के ठीक सामने तुलसी का पौधा स्थापित किया गया है। सनातन परंपरा में तुलसी के विशेष महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे प्रकृति के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

1946 से हो रहा है दुर्गोत्सव का आयोजन

धनसार दुर्गापूजा समिति वर्ष 1946 से दुर्गोत्सव का आयोजन करती आ रही है। इस वर्ष पंडाल के निर्माण और सजावट पर लगभग 17 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। पंडाल की आकर्षक विद्युत सज्जा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

एक ओर भगवान जगन्नाथ की आकृति वाला बाहरी स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, तो दूसरी ओर अंदर की हरियाली और वन देवी की प्रस्तुति पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।

आस्था के साथ पर्यावरण बचाने की अपील

धनसार का यह पूजा पंडाल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी सामने लाता है। पौधों, बरगद और हरियाली के जरिए तैयार की गई थीम लोगों को प्रकृति के संरक्षण के महत्व की याद दिलाती है।

समिति की इस पहल का संदेश है कि त्योहारों के माध्यम से भी पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। मां दुर्गा की आराधना के साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना ही इस थीम की खास पहचान है।

BHARATSUPERFASTNEWS

Read more

Local News