देवघर: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और विधायक सुरेश पासवान की मौजूदगी में रविवार को देवीपुर जाने वाले मार्ग पर बने रेलवे ओवरब्रिज का उद्घाटन किया गया. उद्घाटन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में शामिल होने से पहले एयरपोर्ट पहुंचे सांसद निशिकांत दुबे ने मीडिया से बातचीत के दौरान पहलगाम दौरे का जिक्र किया.
पहलगाम में नहीं है भय का माहौल: बीजेपी सांसद
उन्होंने कहा कि पिछले साल पहलगाम में हुई घटना के एक साल बाद वह खुद वहां गए थे और तीन दिन तक स्थानीय लोगों के बीच रहे. सांसद ने बताया कि वहां की स्थिति अब सामान्य है और लोगों के बीच किसी प्रकार का भय का माहौल नहीं है. उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने भी उन्हें बताया कि इलाके में डर जैसी कोई स्थिति नहीं है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है.
अर्जुन मुंडा के साथ कथित दुर्व्यवहार पर जताई नाराजगी
इस दौरान बीजेपी सांसद ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री को जो सम्मान मिलना चाहिए, यदि वह नहीं मिलता है तो यह जिला प्रशासन की लापरवाही मानी जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में कई बार नियमों के अनुसार काम नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति खड़ी होती है.
राजद विधायक ने सांसद पर बोला हमला
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली. राजद विधायक सुरेश पासवान ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के कार्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सांसद निधि की लगभग 60% राशि अब तक खर्च नहीं हो सकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि निधि की राशि खर्च नहीं होने से क्षेत्र के कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. विधायक ने शंकरपुर समेत अन्य क्षेत्रों में लंबित योजनाओं का भी मुद्दा जोर शोर से उठाया.
सांसद निशिकांत दुबे का पलटवार
विधायक के आरोपों पर पलटवार करते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने दावा करते हुए कहा कि 2009 से 2026 तक के उनके संसदीय कार्यकाल में देवघर में जितना विकास हुआ है, उतना उससे पहले कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यदि देवघर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना आती है तो वह अपनी सांसद निधि की पूरी 60 करोड़ रुपये की राशि देने के लिए भी तैयार हैं.
गौरतलब है कि नावाडीह में पुल बनने के बाद अब लोगों को एम्स जाना काफी आसान होगा. इससे पहले लोगों को एम्स जाने से पहले रेलवे फाटक के पास घंटे तक जाम में फंसा रहना पड़ता था.


