देवघर: झारखंड के देवघर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. सदर अस्पताल से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक डॉक्टरों की कमी और संसाधनों के अभाव की शिकायत आम है. इसी कड़ी में देवघर-दुमका-बासुकीनाथ नेशनल हाईवे पर स्थित खड़गडीहा स्वास्थ्य उपकेंद्र स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक और उदाहरण बन गया है.
आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित यह केंद्र क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के साथ-साथ हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. खासकर सड़क दुर्घटनाओं में यह केंद्र प्राथमिक उपचार देकर कई जिंदगियां बचा सकता था. लेकिन विडंबना यह है कि भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद केंद्र अधिकांश दिनों बंद पड़ा रहता है.
निर्माण पूरा, संचालन ठप
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन-चार साल पहले केंद्र का निर्माण पूरा हो गया था. इसके बावजूद नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं. ग्रामीण बताते हैं कि महीने में सिर्फ सात-आठ दिन ही स्वास्थ्य कर्मी यहां आते हैं, बाकी दिनों में केंद्र ताला बंद रहता है.
ग्रामीणों और हाईवे यात्रियों की दिक्कत
केंद्र बंद रहने से खड़गडीहा और आसपास के गांवों के लोगों को मामूली इलाज के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. हाईवे पर काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि सड़क दुर्घटना होने पर अस्पताल ठीक सामने होने के बावजूद घायलों को देवघर या दुमका ले जाना पड़ता है, जिससे बहुमूल्य समय बर्बाद होता है.
“गोल्डन आवर” की अहमियत
देवघर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शरद कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों का सक्रिय और संसाधनयुक्त होना अत्यंत जरूरी है. दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे (गोल्डन आवर) में प्राथमिक उपचार मिल जाए तो मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि हाईवे किनारे वाले केंद्रों में खास प्राथमिक उपचार व्यवस्था होनी चाहिए.
सिविल सर्जन ने माना लापरवाही
खड़गडीहा स्वास्थ्य उपकेंद्र के बंद रहने के सवाल पर देवघर सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने स्वीकार किया कि यह केंद्र अहम स्थान पर स्थित है. उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. ईटीवी भारत के माध्यम से मामले का संज्ञान होने के बाद मोहनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर जल्द ही आवश्यक कार्रवाई करते हुए केंद्र को नियमित रूप से संचालित कराने का आश्वासन दिया.


