Sunday, July 12, 2026

दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव: पहली बार फिजिकल एसेट्स से आगे निकला इंटैंजिबल इन्वेस्टमेंट

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नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक भौतिक संपत्तियों से आगे बढ़कर ज्ञान और तकनीक आधारित निवेश की ओर तेजी से बढ़ रही है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) और लुइस बिजनेस स्कूल की संयुक्त रिपोर्ट World Intangible Investment Highlights 2026 के अनुसार, पहली बार दुनिया भर में अमूर्त संपत्तियों (Intangible Assets) में निवेश का स्तर मूर्त संपत्तियों (Tangible Assets) से अधिक हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में वैश्विक इंटैंजिबल इन्वेस्टमेंट 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया, जो संबंधित अर्थव्यवस्थाओं के कुल GDP का करीब 12.8 प्रतिशत है। इसके मुकाबले मशीनरी, इमारतों और अन्य भौतिक संसाधनों में निवेश का हिस्सा 11.8 प्रतिशत रहा। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि कंपनियां अब सॉफ्टवेयर, डेटा, रिसर्च, ब्रांड और बौद्धिक संपदा जैसी संपत्तियों को भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक महत्वपूर्ण मान रही हैं।

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही कंपनियां

रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनियों का निवेश अब केवल फैक्ट्रियों, उपकरणों और इमारतों तक सीमित नहीं रह गया है। व्यवसाय तेजी से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), सॉफ्टवेयर, डिजाइन, डेटा, ब्रांड वैल्यू और संगठनात्मक क्षमता विकसित करने पर खर्च कर रहे हैं।

2008 के बाद से इंटैंजिबल एसेट्स में निवेश औसतन 3.5 प्रतिशत वार्षिक गति से बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में टैंजिबल एसेट्स में निवेश की वृद्धि दर करीब 0.98 प्रतिशत रही। रिपोर्ट इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखती है।

2020 से 2025 के बीच भी यही रुझान जारी रहा। इस अवधि में अमूर्त संपत्तियों पर खर्च में औसत वार्षिक वृद्धि 5.5 प्रतिशत रही, जबकि भौतिक संपत्तियों में निवेश 3.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। बढ़ती ब्याज दरों के बावजूद कंपनियों ने डिजिटल तकनीक, सॉफ्टवेयर और संगठनात्मक सुधारों में निवेश जारी रखा।

अमेरिका सबसे बड़ा निवेशक, भारत की रफ्तार भी तेज

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका इंटैंजिबल एसेट्स में दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक है। वर्ष 2025 में अमेरिका ने इस क्षेत्र में लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया, जो जापान जैसे दूसरे बड़े निवेशक से करीब छह गुना अधिक है।

अमेरिका में सॉफ्टवेयर, डेटा, अनुसंधान और AI से जुड़े बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश ने उसकी वैश्विक नवाचार क्षमता को मजबूत किया है।

वहीं भारत, ब्राजील और फिलीपींस जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी ज्ञान आधारित क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इन देशों में डिजिटल सेवाओं, तकनीकी क्षमताओं और नवाचार प्रणालियों में निवेश बढ़ रहा है।

भारत इंटैंजिबल निवेश में तेजी से उभरता बाजार

रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती इंटैंजिबल इन्वेस्टमेंट अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। 2022-23 के दौरान भारत ने रिपोर्ट में शामिल 15 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज 7.9 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की।

भारत में वर्ष 2023 तक इंटैंजिबल इन्वेस्टमेंट करीब 78 अरब अमेरिकी डॉलर (PPP) तक पहुंच गया। औपचारिक रूप से दर्ज इंटैंजिबल एसेट्स का योगदान GDP में लगभग 10 प्रतिशत रहा, जो 2011 में 9.7 प्रतिशत था।

भारत के कुल इंटैंजिबल निवेश में सॉफ्टवेयर और डेटाबेस का हिस्सा करीब 45 प्रतिशत है, जो अध्ययन की गई अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक हिस्सेदारी है। यह देश के मजबूत IT और डिजिटल सेवा क्षेत्र को दर्शाता है। इसके अलावा 2013 से 2023 के बीच ब्रांड निवेश में भी लगभग 7.2 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

AI बदल रहा है निवेश का तरीका

WIPO की रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को निवेश के बदलते स्वरूप का एक प्रमुख कारण बताया गया है। AI एक ओर डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और अन्य भौतिक बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर सॉफ्टवेयर, विशेष डेटा, कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता और संगठनात्मक ज्ञान में भी निवेश को बढ़ावा दे रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार AI से मिलने वाले दीर्घकालिक आर्थिक लाभ केवल हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं होंगे, बल्कि उन अमूर्त संपत्तियों पर भी आधारित होंगे जो कंपनियों की नवाचार क्षमता को मजबूत करती हैं।

संगठनात्मक पूंजी और R&D का बड़ा योगदान

इंटैंजिबल निवेश की विभिन्न श्रेणियों में संगठनात्मक पूंजी की हिस्सेदारी सबसे अधिक 30.5 प्रतिशत है। इसके बाद रिसर्च एंड डेवलपमेंट का योगदान 20.6 प्रतिशत है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक इंटैंजिबल निवेश का 62 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों में पूरी तरह दर्ज नहीं हो पाता। इसकी वजह यह है कि ब्रांडिंग, डिजाइन, बिजनेस प्रोसेस और प्रबंधन सुधारों पर होने वाले कई खर्चों को अक्सर निवेश के बजाय संचालन लागत माना जाता है।

ब्रांड वैल्यू भी बन रही अहम आर्थिक संपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में वैश्विक स्तर पर ब्रांड निवेश करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। मजबूत ब्रांड कंपनियों को ग्राहकों का भरोसा हासिल करने, बाजार में अलग पहचान बनाने और बेहतर मूल्य निर्धारण में मदद करते हैं।

AI आधारित कंटेंट और डिजिटल जानकारी की बढ़ती चुनौती के बीच भरोसेमंद ब्रांड कंपनियों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

WIPO का निष्कर्ष है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब धीरे-धीरे भौतिक संसाधनों पर आधारित मॉडल से हटकर ज्ञान, नवाचार और बौद्धिक पूंजी पर आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि देशों को इंटैंजिबल निवेश को बेहतर तरीके से मापने की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा आर्थिक आंकड़े इसके वास्तविक योगदान को पूरी तरह नहीं दर्शा पाते।

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