Wednesday, August 19, 2026

डायबिटीज और ड्राइविंग: पैरों की नसों में कमजोरी से बढ़ सकता है जोखिम, स्टडी में सामने आई अहम बात.

Share

नई दिल्ली: डायबिटीज का असर केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर शरीर की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। पैरों और टखनों की नसों पर इसका असर होने से चलने-फिरने के साथ कुछ ऐसी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें पैरों की स्थिति का सही अंदाजा जरूरी होता है। ड्राइविंग भी उनमें से एक है।

हाल में सामने आई एक रिसर्च में डायबिटीज से जुड़ी न्यूरोपैथी और वाहन चलाते समय पैडल कंट्रोल के बीच संभावित संबंध का अध्ययन किया गया। शोध के मुताबिक पैरों की संवेदना कम होने पर चालक को बिना नीचे देखे ब्रेक और एक्सीलरेटर के बीच अंतर करने में परेशानी हो सकती है।

क्या है डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी?

डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी डायबिटीज से जुड़ी ऐसी स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर नसों को प्रभावित कर सकता है। इसका असर खास तौर पर पैरों और हाथों में महसूस किया जा सकता है।

इसके संभावित लक्षणों में पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट, जलन या स्पर्श और दबाव का एहसास कम होना शामिल है। कई बार शुरुआती अवस्था में व्यक्ति को इसका स्पष्ट पता भी नहीं चलता।

ड्राइविंग के दौरान क्यों बढ़ सकती है परेशानी?

सामान्य तौर पर चालक सड़क पर ध्यान रखते हुए अपने पैरों की स्थिति महसूस करके ब्रेक या एक्सीलरेटर का इस्तेमाल करता है। शरीर के किसी अंग की स्थिति को बिना देखे महसूस करने की इस क्षमता को प्रोप्रियोसेप्शन कहा जाता है।

यदि पैरों और टखनों की नसों को नुकसान पहुंचा हो, तो दिमाग तक पैरों की स्थिति से जुड़ी जानकारी कम या गलत तरीके से पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में पैडल को सही ढंग से पहचानना या उस पर उचित दबाव डालना मुश्किल हो सकता है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

एक ड्राइविंग सिम्युलेटर आधारित अध्ययन में 44 लाइसेंस प्राप्त ड्राइवरों को शामिल किया गया था। इनमें कुछ प्रतिभागियों को डायबिटीज से संबंधित पैरों की नसों में नुकसान था, जबकि अन्य में ऐसी समस्या नहीं थी।

प्रतिभागियों से चुनौतीपूर्ण सड़क परिस्थितियों में ड्राइविंग कराई गई। अध्ययन के दौरान न्यूरोपैथी वाले कुछ ड्राइवरों में ब्रेक लगाने की स्थिति में गलती से एक्सीलरेटर दबाने जैसी समस्या देखी गई। बिना न्यूरोपैथी वाले समूह में ऐसी गलती नहीं देखी गई।

हालांकि, इस तरह के छोटे सिम्युलेटर अध्ययन से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि डायबिटीज वाले हर व्यक्ति के लिए ड्राइविंग खतरनाक है। जोखिम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और नसों को हुए नुकसान की गंभीरता पर निर्भर कर सकता है।

किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

डायबिटीज से पीड़ित वाहन चालकों को पैरों में लगातार सुन्नपन, झनझनाहट, जलन या संवेदना कम होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर तब, जब ड्राइविंग के दौरान पैडल की स्थिति महसूस करने या दबाव नियंत्रित करने में परेशानी होने लगे।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना उचित है। जरूरत पड़ने पर पैरों की नसों और संवेदना की जांच के साथ ड्राइविंग से जुड़े जोखिम का भी आकलन किया जा सकता है।

सालाना फुट चेकअप हो सकता है मददगार

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए नियमित पैरों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। जांच के दौरान डॉक्टर पैरों की संवेदना, रक्त प्रवाह और नसों से संबंधित संभावित समस्याओं का आकलन कर सकते हैं।

जिन लोगों में न्यूरोपैथी अधिक गंभीर हो, उनके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ड्राइविंग में अतिरिक्त सावधानी या वाहन में उपयुक्त बदलाव पर विचार किया जा सकता है।

सुरक्षा को दें प्राथमिकता

डायबिटीज होना अपने आप में ड्राइविंग पर रोक का मतलब नहीं है। लेकिन यदि पैरों की संवेदना या पैडल कंट्रोल प्रभावित हो रहा है, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड शुगर का उचित प्रबंधन और किसी भी नए न्यूरोपैथी लक्षण की समय पर जांच ड्राइविंग सहित रोजमर्रा की गतिविधियों में सुरक्षा बनाए रखने में मदद कर सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। ड्राइविंग की क्षमता या किसी विशेष चिकित्सा स्थिति को लेकर व्यक्तिगत निर्णय डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।

Read more

Local News