Saturday, March 28, 2026

ठंड और प्रदूषण के कारण खर्राटों की समस्या बढ़ गई है।

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ठंड और प्रदूषण के कारण खर्राटों की समस्या बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार, तापमान में गिरावट और वायु प्रदूषण के बढ़ने से स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ जाता है, जिससे रात में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। यह समस्या हृदय और मस्तिष्क के लिए हानिकारक हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है।

पटना। खर्राटे अब केवल नींद में खलल डालने की समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि सर्दी के मौसम में यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण नाक और गले की नलियों में सूजन आ रही है, जिससे सोते समय शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। इसका सीधा असर रक्तचाप, हृदय और मस्तिष्क पर पड़ रहा है।

राजधानी के सरकारी अस्पतालों पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में इन दिनों खर्राटों से जुड़ी शिकायतों को लेकर रोजाना 110 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अकेले आईजीआईएमएस में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या पांच से दस तक ही रहती थी।

ईएनटी और रेस्पिरेटरी विभागों में बढ़ी भीड़

चिकित्सकों के अनुसार सबसे अधिक मरीज ईएनटी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में आ रहे हैं। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. आइएस ठाकुर ने बताया कि यदि खर्राटे रोजाना आने लगें और आवाज बहुत तेज हो, तो यह हृदयाघात और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।

उन्होंने कहा कि खर्राटों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह धीरे-धीरे शरीर के ऑक्सीजन स्तर, रक्तचाप और हृदय की धड़कन को प्रभावित करता है।

प्रदूषण से बढ़ रही सूजन और संक्रमण

आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल के अनुसार ठंड के मौसम में हवा में मौजूद प्रदूषण के सूक्ष्म कण नाक और गले की नलियों में सूजन और संक्रमण पैदा करते हैं। इससे मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। परिणामस्वरूप खर्राटे तेज हो जाते हैं और शरीर पर अतिरिक्त तनाव बढ़ता है।

उन्होंने बताया कि खर्राटों की आवाज 40 से 120 डेसीबल तक हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकेत है।

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