मुंबई: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच राहत भरी खबर आने से मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों ने जबरदस्त वापसी की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेतों के बाद वैश्विक बाजारों में उत्साह देखा गया, जिसका सीधा सकारात्मक असर घरेलू शेयर सूचकांकों—सेंसेक्स और निफ्टी—पर पड़ा.
बाजार का ताजा हाल
सुबह के सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 413 अंक या 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,979 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 112 अंक या 0.47 प्रतिशत चढ़कर 24,140 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया. बाजार की इस तेजी में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने मुख्य सूचकांकों से भी बेहतर प्रदर्शन किया, जहां निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
इस तेजी का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट है. राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 10 प्रतिशत से अधिक टूट गईं. ट्रंप ने संकेत दिया कि संघर्ष “लगभग पूरा” हो चुका है और यह “बहुत जल्द” समाप्त हो जाएगा. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.
सेक्टोरल अपडेट: ऑटो और फार्मा में बढ़त
आज के कारोबार में आईटी और ऑयल एंड गैस को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में रहे. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.95%), ऑटो (1.47%) और फार्मा (1.28%) सेक्टर सबसे अधिक लाभ कमाने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे. दूसरी ओर, कच्चे तेल की गिरती कीमतों के कारण ऑयल एंड गैस सेक्टर में 0.47 प्रतिशत की गिरावट देखी गई.
वैश्विक संकेतों का प्रभाव
भारतीय बाजारों ने एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत लिए. जापान का निक्केई 2.35 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.8 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ बंद हुआ. अमेरिकी बाजार (नैस्डैक और डॉ जोन्स) भी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे निवेशकों का मनोबल बढ़ा.
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,200–24,250 का स्तर एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में कार्य करेगा, जबकि 23,900–23,950 के बीच मजबूत सपोर्ट देखा जा रहा है. हालांकि बाजार में सुधार दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे भू-राजनीतिक गतिविधियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली पर नजर बनाए रखें.


