Saturday, March 7, 2026

झारखंड सरकार ने अंतिम वित्त महीने में फिजूलखर्ची और अनियंत्रित राशि निकालने पर रोक लगा दी है.

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रांची: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम महीने मार्च में फिजूलखर्ची और अनियंत्रित राशि निकासी (जिसे आमतौर पर ‘मार्च लूट’ कहा जाता है) पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है. वित्त विभाग ने 6 मार्च 2026 को जारी पत्र के माध्यम से मार्च माह में विभागों द्वारा राशि निकासी की सीमा 15 प्रतिशत तय कर दी है.

वित्त सचिव प्रशांत कुमार के हस्ताक्षर से जारी पत्रांक 735/दिनांक 06-03-2026 के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के मार्च महीने में कुल आवंटित राशि का अधिकतम 15 प्रतिशत ही निकाला जा सकेगा. इस निर्देश को राज्य सरकार के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त, उपायुक्त, कोषागार अधिकारी तथा उप-कोषागार पदाधिकारियों को भेजा गया है.

डोरंडा कोषागार के प्रभारी लेखा अधीक्षक नाजिर अनवर ने बताया कि वित्त विभाग के इन निर्देशों के अनुसार ट्रेजरी से विपत्रों (बिलों) का भुगतान किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थापना व्यय (establishment expenditure) सहित कुछ विशेष मदों को छोड़कर अन्य सभी मदों में 15 प्रतिशत की सीमा से अधिक निकासी नहीं की जाएगी. 6 मार्च 2026 को जारी इस पत्र से पहले प्राप्त विपत्रों पर भी यही नियम लागू होगा.

छूट प्राप्त मद और विशेष प्रावधान

  • वित्त विभाग ने कुछ मदों में छूट प्रदान की है, ताकि महत्वपूर्ण योजनाओं पर असर न पड़े.
  • केंद्रीय योजनाओं के तहत आवंटित राशि के विरुद्ध पूरी राशि निकाली जा सकेगी.
  • केंद्र प्रायोजित योजनाओं के केंद्रांश के रूप में प्राप्त संपूर्ण राशि तथा उसके समानुपातिक राज्यांश की राशि पूरी निकाली जा सकेगी.
  • तृतीय अनुपूरक बजट में प्रावधानित राशि के विरुद्ध जारी आवंटन की पूरी राशि निकाली जा सकेगी, बशर्ते यह निकासी वास्तविक कार्यों/खर्च के विरुद्ध हो.
  • पीएल खाते (Personal Ledger Accounts) से भी केवल 15 प्रतिशत की सीमा तक ही राशि निकाली जा सकेगी.
  • स्थापना व्यय (जैसे वेतन, पेंशन आदि) के मद में पूरी राशि ट्रेजरी से निकाली जा सकेगी.

यह कदम वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, वित्तीय वर्ष के अंत में फिजूलखर्ची रोकने और बजट का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. आमतौर पर मार्च महीने में विभाग अनावश्यक खर्च कर बजट की बची राशि को समाप्त करने की कोशिश करते हैं, जिसे ‘मार्च लूट’ कहा जाता है. अधिक निकासी के लिए विशेष मामलों में वित्त विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी. यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं.

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