रांचीः झारखंड विधानसभा सचिवालय में कार्यरत कनीय सचिवालय सहायक अंजना तिवारी की एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर सामान्य गॉलब्लैडर ऑपरेशन के बाद हुई मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर पर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि विधानसभा सचिवालय के कर्मियों में भी घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा गया.
अंजना खुद चलकर अस्पताल पहुंची थी- परिजन
परिजन के मुताबिक अंजना तिवारी को 24 मई 2026 को रांची स्थित निजी अस्पताल में गॉलब्लैडर ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था. अंजना के रिश्तेदार और पटना में इंस्पेक्टर पद पर तैनात सुनील कुमार शुक्ला ने ईटीवी भारत को बताया कि भर्ती के समय अंजना की सभी चिकित्सीय जांच सामान्य थीं और वो खुद चलकर अस्पताल पहुंची थीं.
अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी लड़ाई की तैयारी
परिजनों का आरोप है कि एक सामान्य ऑपरेशन के बाद अंजना की हालत अचानक बिगड़ती चली गई. बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें 8 यूनिट रक्त और 2 यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया, जिसे परिजन सामान्य गॉलब्लैडर सर्जरी के लिहाज से असामान्य बता रहे हैं. स्थिति गंभीर होने पर अंजना तिवारी को 24 मई की रात भगवान महावीर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 मई 2026 की सुबह करीब 9 बजे उनकी मृत्यु हो गई. परिजन ने इसे सीधे तौर पर डॉक्टर की लापरवाही बताया है. उन्होंने कहा है कि वह इंसाफ के लिए हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
कोरोना काल में अंजना के पति का हुआ था निधन
सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि अंजना तिवारी के पति और उनके छोटे भाई दीपक शुक्ला की कोरोना काल में वर्ष 2021 में संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई थी. दीपक शुक्ला विधानसभा में कार्यरत थे. उनके निधन के बाद अंजना तिवारी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी. परिवार में उनकी 16 वर्षीय एकमात्र पुत्री है.
विधानसभा कर्मियों में आक्रोश, धरना पर बैठे
इधर, अंजना तिवारी के निधन की खबर से विधानसभा सचिवालय के कर्मियों में शोक और आक्रोश दोनों देखा गया. सोमवार दोपहर उनके पार्थिव शरीर को विधानसभा परिसर लाया गया, जहां कर्मचारियों ने धरना देकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.
झारखंड विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार ने अंजना तिवारी के निधन पर शोक व्यक्त किया है. अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई के बाबत पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे मामले से जिला प्रशासन को अवगत करा दिया गया है. प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद आगे फैसला लिया जाएगा.
अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अर्णव ने बताया कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर राजेश कुमार मारू को मामले की जानकारी दे दी गई है. उन्होंने कहा कि फिलहाल डॉक्टर सर्जरी में व्यस्त हैं और उपलब्ध होने पर अपना पक्ष रखेंगे.
फिलहाल इस घटना ने निजी अस्पतालों में उपचार व्यवस्था, सर्जिकल सुरक्षा और मरीजों की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजन मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं.


