Monday, March 16, 2026

झारखंड में LPG की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है.

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रांचीः झारखंड में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. झारखंड विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य में गैस आपूर्ति की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है और इसका असर झारखंड में भी दिखाई दे रहा है.

बुकिंग अवधि बढ़ने से उपभोक्ता परेशान

मंत्री ने बताया कि राज्य में कमर्शियल और घरेलू एलपीजी की डिलीवरी में परेशानी उत्पन्न हो गई है. इसकी वजह से गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि भी बढ़ा दी गई है. अब शहरी उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की अवधि 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 45 दिन कर दी गई है.

उन्होंने कहा कि पहले गैस बुकिंग के 48 घंटे के भीतर सिलेंडर की आपूर्ति हो जाती थी, लेकिन अब डिलीवरी में 3 से 4 दिन तक का समय लग रहा है. 16 मार्च 2026 तक राज्य में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की ओर से गैस आपूर्ति में कुल 3,27,630 रिफिल पेंडिंग हैं.

कमर्शियल गैस की आपूर्ति में भारी कटौती

मंत्री ने बताया कि 13 मार्च को केंद्र सरकार के साथ हुई वीडियो कॉंफ्रेंसिंग में जानकारी दी गई कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति को 80 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है. 14 मार्च को राज्य सरकार और तेल कंपनियों के साथ हुई बैठक में यह सामने आया कि झारखंड में हर महीने औसतन 2273.11 मीट्रिक टन कमर्शियल गैस की जरूरत होती है, जबकि अब केवल 454.6 मीट्रिक टन की आपूर्ति ही हो पाएगी. इस तरह राज्य को हर महीने 1818.51 मीट्रिक टन गैस की कमी झेलनी पड़ सकती है.

उद्योग और होटल व्यवसाय पर असर

मंत्री ने कहा कि रांची और जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहरों में कई बड़े उद्योग संचालित होते हैं. इन उद्योगों के कैंटीन में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के लिए भोजन की व्यवस्था गैस सिलेंडर पर निर्भर है. गैस आपूर्ति बाधित होने से औद्योगिक गतिविधियों और उत्पादन पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, होटल और दूसरी कमर्शियल जगहों को भी चलाने में मुश्किलें आ सकती हैं.

अंतरराष्ट्रीय हालात का असर

मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने युद्ध जैसे हालात और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति का असर भारत और झारखंड पर भी पड़ रहा है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस स्थिति पर स्पष्ट रणनीति और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की. साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अंतरराष्ट्रीय संकट लंबा खिंचता है तो देश की ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक नीति और आम लोगों की रसोई पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है. मंत्री ने केंद्र सरकार से एलपीजी के साथ-साथ उर्वरक की आपूर्ति को लेकर भी स्पष्ट तैयारी बताने की मांग की.

संसदीय कार्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि आपकी सरकार के मालिक डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व को रुस से तेल खरीदने की अनुमति दे दी है पर जो तेल आप रुस से लेंगे वे वैश्विक दर पर होगा. इस दौरान इंडिया स्पेसिफिक डिस्काउंट नहीं मिलेगा. अगर यह युद्ध महीना खींच गया तो आपकी मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी का तेल निकल जाएगा.

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