रांची। झारखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़े किसानों के राशन कार्ड को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। कृषि विभाग के निर्देश के अनुसार, किसी किसान का राशन कार्ड केवल इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि वह किसी एफपीओ का निदेशक या बोर्ड सदस्य है। इस संबंध में कृषि सचिव अबुबक्कर सिद्दीख ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर जरूरी कदम उठाने को कहा है।
केंद्रीय मंत्रालय के निर्देश के बाद भी सामने आईं शिकायतें
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार की राशन कार्ड डेटाबेस की जांच और डेटा सुधार प्रक्रिया के दौरान कई एफपीओ निदेशकों को नोटिस भेजे गए हैं। इससे संबंधित किसानों के बीच राशन कार्ड का लाभ बंद होने की आशंका पैदा हुई। कुछ किसानों ने कथित तौर पर एफपीओ में अपने पद से इस्तीफा देने की बात भी कही है।
कृषि विभाग का कहना है कि केवल कंपनी का निदेशक या बोर्ड सदस्य होने से किसी किसान को खाद्य सुरक्षा योजनाओं के लिए अपात्र नहीं माना जा सकता। पात्रता का आकलन संबंधित नियमों और निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उपायुक्तों को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा
कृषि सचिव ने सभी उपायुक्तों से कहा है कि वे संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दें, ताकि एफपीओ के निदेशकों के नाम सिर्फ उनके पद के आधार पर राशन कार्ड सूची से नहीं हटाए जाएं। विभाग ने सत्यापन और डेटाबेस सुधार की प्रक्रिया के दौरान छोटे तथा सीमांत किसानों के वैध अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया है।
सरकार के अनुसार, राशन कार्ड की पात्रता तय करते समय व्यक्ति की वास्तविक स्थिति और लागू नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है। एफपीओ में पद पर होना अपने आप में अपात्रता का प्रमाण नहीं है।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए क्यों अहम हैं एफपीओ?
किसान उत्पादक संगठन छोटे और सीमांत किसानों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। इनके माध्यम से किसानों को बेहतर कृषि तकनीक, खाद-बीज और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। इन संगठनों के बोर्ड में भी बड़ी संख्या में खेती से जुड़े स्थानीय किसान शामिल होते हैं।
कृषि विभाग का मानना है कि केवल निदेशक होने के आधार पर राशन कार्ड का लाभ रोकने से किसानों में अनावश्यक चिंता पैदा हो सकती है और वे संगठन से अपना जुड़ाव खत्म करने पर विचार कर सकते हैं।
झारखंड में करीब 550 एफपीओ, कई जगहों से शिकायतें
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में करीब 550 किसान उत्पादक संगठन हैं। इनमें से लगभग एक दर्जन एफपीओ ने राशन कार्ड से नाम हटाए जाने के मामले में कृषि विभाग से शिकायत की है। रिपोर्ट में बोकारो जिले के जरीडीह और कसमार प्रखंडों के कुछ एफपीओ निदेशकों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जाने का भी उल्लेख है।
जरीडीह तेजस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशकों को लेकर भी ऐसी शिकायत सामने आई है। इन मामलों के बाद किसानों के बीच यह चिंता बढ़ी कि एफपीओ में जिम्मेदारी निभाने के कारण उन्हें सरकारी खाद्य सुरक्षा योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
कृषि विभाग के निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राशन कार्ड की पात्रता की जांच वास्तविक नियमों के अनुसार हो और किसी किसान का नाम केवल एफपीओ में पद होने के कारण न हटाया जाए।
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