रांचीः झारखंड के अलग-अलग जिलों में हाल के दिनों में पुलिस ने जिन अवैध आर्म्स फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया है उनका पश्चिम बंगाल से बेहद गहरा कनेक्शन है. कनेक्शन फाइनेंस का भी है और तस्करी का भी है. मामला इतना गंभीर है कि झारखंड और कोलकाता एटीएस एक साथ मिलकर इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए काम कर रही है.
झारखंड में पश्चिम बंगाल के हथियार तस्कर अवैध हथियारों के निर्माण के लिए फाइनेंस कर रहे हैं. झारखंड और पश्चिम बंगाल एटीएस की जांच में यह बात सामने आई. झारखंड के गिरिडीह, धनबाद और बोकारो जिले में तीन बड़ी आर्म्स फैक्ट्री का खुलासा हुआ था. तीनों आर्म्स फैक्टरी के खुलासे में पश्चिम बंगाल एटीएस का भी विशेष हाथ रहा था. पूरे मामले की जांच के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई है.
पश्चिम बंगाल एटीएस की जांच में यह बात सामने आई है कि पश्चिम बंगाल के कई हथियार तस्कर आर्थिक सहयोग करके झारखंड में हथियार फैक्ट्री चला रहे हैं. उन हथियार फैक्टरियों में पश्चिम बंगाल और बिहार के मुंगेर जिले के कुशल हथियार कारीगर काम कर रहे हैं. हाल के दिनों में जिन तीन जगह पर झारखंड में आर्म्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था वहां से पकड़े गए हथियार कारीगरों ने भी बंगाल कनेक्शन का खुलासा किया है.
अवैध आर्म्स फैक्ट्री में हथियार बनाते पकड़े गए मुंगेर के कारीगरों ने यह खुलासा किया है कि उन्हें विशेष कर नाइन एमएम पिस्टल बनाने के लिए ही झारखंड लाया गया था. पिछले 1 साल के दौरान उन्होंने लगभग 500 से ज्यादा पिस्टल बनाए हैं ,जिसे बंगाल से आए कुछ लोग फल और सब्जी की टोकरी में डाल कर अपने साथ ले गए. पकड़े गए हथियार कारीगरों ने एटीएस को यह भी जानकारी दी है कि हथियारों की तस्करी कहां-कहां की जाती थी.पकड़े गए कारीगरों से जो जानकारी हासिल हुई है उसके अनुसार झारखंड में बने अवैध हथियारों को बिहार, यूपी, बंगाल से लेकर भारत के कई राज्यों में तस्करी की जाती है. खरीदारों में अपराधी से लेकर नक्सली तक शामिल हैं.

एसेंबल कर अर्ध निर्मित हथियार भेजे गए बिहार
एटीएस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि झारखंड के आर्म्स फैक्ट्री में बने अर्ध निर्मित हथियारों को असेंबल करने के लिए बिहार के मुंगेर भी भेजा जाता था. बताया जा रहा है कि बेहद उम्दा किस्म के पिस्तौल बनाने के लिए हथियारों का खाका तैयार कर उसे मुंगेर के बेहतरीन कारीगरों के पास भेजा जाता था.
कोड वर्ड में होती थी डीलिंग
एटीएस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि हथियार तस्कर कोड वर्ड में हथियार की डीलिंग करते थे. छापेमारी के क्रम में जो मोबाइल बरामद हुए हैं उसमें राजा, रानी और सेक्सी जैसे कोड वर्ड के जरिए हथियारों की डीलिंग की गई है. यहां तक की हथियार तस्करों के नाम भी कोड वर्ड में ही मोबाइल में दर्ज थे.

इस संबंध में झारखंड एटीएस के एसपी ऋषभ झा बताया कि अब तक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि हथियारों के निर्माण, पैसों के लेनदेन और हथियार तस्करी के लिए टेलीग्राम और जंगी जैसे एप का प्रयोग हथियार तस्कर करते थे.
बिहार के मुंगेर जिले मैं अवैध हथियार निर्माण को घोषित रूप से कुटीर उद्योग का दर्जा प्राप्त है. कुशल कारीगर विदेशी पिस्टल जैसा ही डुप्लीकेट तैयार करते हैं. मुंगेर के कारीगरों के द्वारा बनाई गई पिस्टल की बनावट ऐसी होती है की असली भी उसके सामने मात खा जाए. मुंगेर के कारीगरों के द्वारा बनाई गई पिस्टल कम दामों के साथ ही पूरी तरह गारेंटेड होते हैं. बनावट और बेहतरीन डिजाइन की वजह से मुंगेर के कारीगरों के द्वारा बनाए गए हथियारों की मांग बड़े अपराधियों तक है.
मुंगेर के कारीगरों के द्वारा बनाए गए डुप्लीकेट नाइन एमएम पिस्टल पर भी मेड इन रूस या अमेरिका लिख कर बेचा जाता है. एटीएस की जांच में यह बात सामने आई है कि झारखंड में मुंगेर के कारीगरों के द्वारा बनाए गए नाइन एमएम पिस्टल की कीमत 50 हजार से लेकर 5 लाख तक की होती है.
झारखंड और बंगाल एटीएस के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि हाल के दिनों में हथियार निर्माण को लेकर जितने भी गिरफ्तारियां हुई हैं उन कारीगरों को हथियार नेटवर्क के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है. उन्हें आउटसोर्स के जरिए ही पैसे उपलब्ध करवाए जाते थे. बंगाल के हथियार तस्कर झारखंड में अवैध आर्म्स फैक्टरी का निर्माण कर वहां कारीगरों को भेज देते थे. फैक्ट्री में ही हथियार बनाने के सारे सामान उपलब्ध रहते थे. हथियार निर्माण पूरा होने के बाद कारीगर वापस मुंगेर लौट जाते थे.
झारखंड एटीएस के एसपी ऋषभ झा ने बताया कि पिछले 3 महीने से पश्चिम बंगाल एटीएस और झारखंड एटीएस की टीम इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में लगी हुई है. हथियार फैक्ट्री का बड़ा कनेक्शन पश्चिम बंगाल से जुड़ा हुआ है. पश्चिम बंगाल से ही हथियार फैक्ट्री के लिए धन का प्रबंध भी किया जा रहा है. एटीएस की टीम गिरफ्तार तस्करों से लगातार पूछताछ कर रही है, ताकि यह जानकारी मिल सके कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग हैं और हथियारों की सप्लाई कहां-कहां होती थी.
एटीएस एसपी के अनुसार गिरफ्तार कारीगरों के मोबाइल से जो कोड मिले हैं उनके डिकोड होने के बाद भी कई अहम जानकारियां हासिल हो सकती हैं. जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल इस नेटवर्क के एक दर्जन से ज्यादा लोगों पर नजर रखी जा रही है.
कोलकाता और झारखंड एटीएस में हाल के दिनों में दो महत्वपूर्ण छापेमारी की थी. जिसमें अवैध आर्म्स फैक्ट्री का खुलासा हुआ था और बड़े पैमाने पर आर्म्स पकड़े गए थे. 28 मई 2025 को धनबाद में अवैध हथियार फैक्ट्री का खुलासा किया गया था. जिसमें मुंगेर के चार कारीगर समेत पांच को गिरफ्तार किया गया था. धनबाद से एटीएस की टीम ने दर्जनों की संख्या में अर्ध निर्मित हथियार बरामद किए थे. इसी साल फरवरी महीने में झारखंड के गिरिडीह जिले में भी हथियार फैक्ट्री का खुलासा हुआ था. गिरिडीह के जमुआ में हथियार फैक्ट्री में बनाए गए हथियार बरामद किए गए थे.
वहीं 19 जून 2025 को झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो में कोलकाता एटीएस और झारखंड एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में भी एक बड़े आर्म्स फैक्ट्री का खुलासा हुआ. बोकारो से भी भारी मात्रा में अर्ध निर्मित और निर्मित हथियार बरामद किए गए. बोकारो से भी मुंगेर के कारीगर ही गिरफ्तार किए गए हैं.


