Saturday, June 27, 2026

झारखंड के हेल्थ सेंटर्स को संसाधन संपन्न बनाने के लिए अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है.

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रांची: झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ और संसाधन संपन्न बनाने के लिए बड़ा फैसला किया है. अब राज्य के पीएचसी, सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी अपने-अपने सेंटर की सुविधाओं को बढ़ाने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेवार होंगे.

अस्पताल चाहे सदर हो या अनुमंडल, सीएचसी हो या आयुष्मान आरोग्य मंदिर, वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी वहां की व्यवस्था सुधार को लेकर पूरी तरह जिम्मेवार होंगे. इसके लिए अब उन्हें अपने जिले के सिविल सर्जन पर आश्रित नहीं रहना होगा.

  • राज्य के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अजय कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के हेल्थ सेंटर्स को संसाधन संपन्न बनाने में हो रही व्यावहारिक परेशानियों को दूर करते हुए अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया गया है. अब सभी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों को डीडीओ बना दिया है. इसका लाभ यह होगा कि अब वह मरीज और संस्थान के हित में न सिर्फ स्वयं निर्णय ले सकेंगे बल्कि राशि भी खर्च कर सकेंगे. जब उन्हें वित्तीय पॉवर मिलेगा तो स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था के लिए भी वहां के चिकित्सा पदाधिकारी पूरी तरह जिम्मेवार होंगे.
  • झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को जरूरी और छोटे-मोटे कार्यों के लिए न तो सिविल सर्जन की अनुमति लेनी होगी और न ही खर्च के लिए राशि के लिए उनपर निर्भर रहना होगा. स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को अब संस्थान की व्यवस्था सुधारने के लिए सिविल सर्जनों के चक्कर भी नहीं काटने होंगे. मरीजों के लिए जरूरी दवाएं या उपकरण खरीदनी हो या स्वास्थ्य कर्मी आउटसोर्स करने की जरूरत, संस्थान के लिए हर जरूरी कार्यों का निर्णय भी वही करेंगे और उसे पूरा भी करेंगे.
  • अपर मुख्य सचिव एके सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रख-रखाव योजना के तहत सरकार सभी अस्पतालों को हर वर्ष राशि उपलब्ध कराती है. स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को डीडीओ बनाए जाने के बाद अब वह उक्त राशि के लिए सिविल सर्जन पर आश्रित नहीं रहना होगा. उस राशि को वह अपने संस्थान की जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी पर खुद खर्च कर सकेंगे.
  • बता दें कि राज्य की सरकार सदर अस्पतालों को 75 लाख, अनुमंडल अस्पताल को 50 लाख, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/रेफ़रल अस्पताल को 10 लाख, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 05 लाख एवं स्वास्थ्य उप केंद्र/आयुष्मान आरोग्य मंदिर को हर वर्ष 2 लाख रुपये उपलब्ध कराती है.

अब यह राशि केंद्र प्रभारी अपनी जरूरत के अनुसार खर्च कर सकेंगे. इसके साथ ही कंटीजेंसी फंड के खर्च का अधिकार भी केंद्र प्रभारियों को दिया गया है. यही नहीं, स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी अबुआ स्वास्थ्य एवं आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का खर्च भी स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी पर कर सकेंगे.

स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय का असर यह होगा कि एक तरफ तो सिविल सर्जन पर कार्यो का बोझ कम होगा. दूसरा यह कि स्वास्थ्य केंद्रों के मेडिकल अफसर इंचार्ज अपनी जरूरत के अनुसार मरीजों के बेहतरी के लिए अस्पताल को विकसित कर सकेंगे.

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