स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल है. सदर अस्पताल में सालों से ऑक्सीजन प्लांट बंद है. वेंटिलेटर मशीन जंग खा रही है. इसके साथ ही जन औषधि केंद्र में दवा उपलब्ध नहीं है. जिसकी वजह से मरीजों के परिजनों को दवा बाहर से ऊंचे दामों पर मंगवानी पड़ रही है.
दरअसल, जामताड़ा सदर अस्पताल में हालात ऐसे हैं कि यहां पर्याप्त डॉक्टर तक नहीं है. यहां डॉक्टर की भारी कमी है. इसके साथ ही जन औषधि केंद्र में दवा उपलब्ध नहीं रहती है. जब इस मामले में जन औषधि चलाने वाले संचालक से पूछा गया कि यहां दवा क्यों नहीं मिलती है तो संचालक ने कहा कि जितना ऑर्डर दिया जाता है उतनी दवाओं की आपूर्ति नहीं हो पाती है.
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों के परिजनों ने बताया कि उन्हें ऊंचे दामों पर बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है. अपनी बेटी का इलाज कराने सदर अस्पताल में आए एक शख्स ने बताया कि बेटी को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है लेकिन यहां अस्पताल में दवा मौजूद नहीं है.
इसके साथ सदर अस्पताल में मरीज को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं. दरअसल, सदर अस्पताल में मरीज के लिए सरकारी भोजन उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था है. इसके लिए सरकार उचित पैसा भी देती है लेकिन मरीज को पौष्टिक खाना नहीं मिल रहा है. ईटीवी भारत ने इसका जायजा लिया तो पता चला कि 100 मरीजों के आसपास ही भोजन बनता है. साथ ही किचन के आसपास साफ सफाई नहीं दिख रही थी.
सदर अस्पताल में लाखों रूपये खर्च कर वेंटीलेटर बेकार पड़े हैं. आलम यह है कि वेंटिलेटर का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है. पूरे जामताड़ा में 96 डॉक्टर के पद स्वीकृत है. जिसमें मात्र 50% डॉक्टर उपलब्ध हैं. इन्हीं चिकित्सकों से काम लिया जा रहा है. जिले में कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या 18 हैं. चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जबकि जामताड़ा जिले में 6 प्रखंड हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग में अभी भी चार ही ब्लॉक सामुदायिक केंद्र चल रहे हैं. दो प्रखंड में मात्र 6 बेड का पीएससी ही चल रहा है जबकि ब्लॉक में 30 बेड की जरूरत है.
डॉक्टरों की कमी पर सिविल सर्जन ने बताया कि जल्द ही डॉक्टरों की पोस्टिंग की जाएंगी. सरकार भी नजर रख रही है. उन्होंने मरीजों को मिलने वाले भोजन पर कार्रवाई करने एवं बेकार पड़े वेंटिलेटर को चालू करने की बात कही है.


