Friday, April 10, 2026

जयप्रकाश गौड़ ने कर्ज में डूबी जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण पर अडानी ग्रुप पर पूरा भरोसा जताते हुए सीओसी के फैसले का स्वागत किया.

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नई दिल्ली: जेपी ग्रुप (Jaypee Group) के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन जयप्रकाश गौड़ ने कर्ज में डूबी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अडाणी ग्रुप द्वारा किए जा रहे अधिग्रहण पर अपना पूरा भरोसा जताया है. उन्होंने कहा कि ऋणदाताओं की समिति (CoC) द्वारा लिया गया यह फैसला बेहद पारदर्शी है और वे इसका पूरा सम्मान करते हैं.

अडाणी के नेतृत्व पर जताया विश्वास
एक आधिकारिक बयान में जयप्रकाश गौड़ ने कहा, “कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने अडाणी ग्रुप को सफल समाधान आवेदक के रूप में चुना है. मुझे पूरा विश्वास है कि गौतम अडाणी के कुशल नेतृत्व में जयप्रकाश एसोसिएट्स की विरासत को नई ऊर्जा, जिम्मेदारी और नए उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ाया जाएगा”. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से कंपनी से जुड़े सभी हितधारकों की आकांक्षाएं पूरी होंगी.

जेपी ग्रुप के संस्थापक ने किया अडाणी के अधिग्रहण का समर्थन, जताया पूरा भरोसा

निष्पक्ष प्रक्रिया की तारीफ
गौड़ ने पूरी दिवाला समाधान प्रक्रिया के संचालन की सराहना की. उन्होंने ऋणदाताओं की समिति और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया अत्यंत निष्पक्ष और पारदर्शी रही है. इसके साथ ही उन्होंने अडाणी ग्रुप के साथ-साथ इस रेस में शामिल रहे वेदांता ग्रुप को भी धन्यवाद दिया.

1979 से शुरू हुआ था सफर
कंपनी के सुनहरे दिनों को याद करते हुए भावुक अंदाज में गौड़ ने कहा कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि 1979 से शुरू हुआ उनके जीवन का एक लंबा सफर है. जेपी ग्रुप ने देश को बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, भारी सीमेंट क्षमता और ‘विश टाउन’ जैसे बेहतरीन इंटीग्रेटेड टाउनशिप के रूप में कई प्रतिष्ठित और राष्ट्रीय संपत्तियां दी हैं.

अदालती लड़ाई में अडाणी को राहत
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज द्वारा पेश किए गए रेजोल्यूशन प्लान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. प्रतिद्वंद्वी कंपनी वेदांता ग्रुप ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत अडाणी की लगभग ₹14,535 करोड़ की बोली को मंजूरी दी गई थी. वेदांता का दावा था कि उनकी लगभग ₹17,000 करोड़ की बोली अडाणी से बड़ी थी, लेकिन लेनदारों ने अडाणी के प्रस्ताव को चुना. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला पहले से ही NCLAT के पास अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, इसलिए वे इस स्तर पर दखल नहीं देंगे.

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