BHARATSUPERFASTNEWS | जमशेदपुर: डीजल जेनरेटर से होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सख्ती दिखाई है। प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा मेन अस्पताल (TMH) समेत जमशेदपुर के 12 औद्योगिक, चिकित्सा और व्यावसायिक संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
संबंधित संस्थानों को नोटिस मिलने की तारीख से 180 दिनों के भीतर प्रदूषण नियंत्रण के आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया गया है। तय समय में नियमों का पालन नहीं करने पर प्रतिदिन 7,500 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक पर्यावरणीय मुआवजा देना पड़ सकता है।
इन 12 संस्थानों को जारी हुआ नोटिस
डीजल जेनरेटर से होने वाले प्रदूषण को लेकर जिन संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- टाटा स्टील
- टीआरएफ
- टाटा पिगमेंट
- एसटीपी लिमिटेड
- शिवा प्लास्टिक
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड
- टाटा मोटर्स
- टाटा मेन अस्पताल (TMH)
- टाटा मोटर्स अस्पताल
- टिनप्लेट अस्पताल
- होटल साउथ पार्क
- मिथिला मोटर्स
180 दिनों में लगाने होंगे प्रदूषण नियंत्रण उपकरण
प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने संबंधित संस्थानों को उनके डीजल जेनरेटर की क्षमता के अनुसार रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (RECD) लगाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा प्रदूषण कम करने के लिए उपयुक्त तकनीक अपनाने को भी कहा गया है।
इसके लिए नोटिस जारी होने की तारीख से 180 दिनों यानी लगभग छह महीने की समय सीमा निर्धारित की गई है।
नियम तोड़ने पर हर दिन 25 हजार रुपये तक मुआवजा
निर्धारित समय सीमा में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुर्माने की राशि जेनरेटर की क्षमता और नियमों के उल्लंघन के आधार पर तय होगी।
इसके तहत प्रतिदिन 7,500 रुपये, 15,000 रुपये या 25,000 रुपये तक का पर्यावरणीय मुआवजा वसूले जाने का प्रावधान बताया गया है।
जेएचआरसी ने RTI के जरिए उठाया था मामला
दरअसल, झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के आधार पर डीजल जेनरेटर से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा उठाया था। इसके बाद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 12 संस्थानों को नोटिस जारी किया।
डीजल जेनरेटर का धुआं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक
डीजल जेनरेटर से निकलने वाले धुएं में PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें हो सकती हैं। इन प्रदूषकों के संपर्क में आने से सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों पर वायु प्रदूषण का प्रभाव विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। ऐसे में जेनरेटर से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए जरूरी है।
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