क्या आपका बच्चा अंडरवेट है? क्या आपका बच्चा कमजोर है? तो यह खबर आपके लिए है. जिस तरह ज्यादा वजन होने से कई हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं, उसी तरह कम वजन होने से भी हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं. यह सिर्फ बड़ों पर ही नहीं, बल्कि बच्चों पर भी लागू होता है. कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनके बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ रहा है. इस बारे में, आइए जानते हैं कि अगर माता-पिता अपने बच्चे का वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, और इस मामले में एक्सपर्ट्स का क्या कहना है…
बच्चे का वजन न बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि कैलोरी या पोषक तत्वों का कम सेवन, आयरन की कमी, असंतुलित आहार, स्तनपान में दिक्कतें, या खाने की खराब आदतें. इन कारणों की पहचान करके और सही समय पर जरूरी कदम उठाने से बच्चे की ग्रोथ और इम्यूनिटी दोनों बेहतर हो सकती हैं, इसके साथ ही माता पिता को इस बात का भी खास ख्याल रखना होगा…
अपने बच्चे को जबरदस्ती खाना न खिलाएं
NHS.UK की वेबसाइट के मुताबिक, कुछ माता-पिता, अपने बच्चे के कम वजन को लेकर चिंतित होकर, उन्हें जबरदस्ती खाना खिलाने की कोशिश करते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बच्चों की खाने में दिलचस्पी कम हो सकती है. जबरदस्ती खाना खिलाने से बच्चे ज्यादा खाने के बजाय असल में कम खा सकते हैं. इससे बच्चे ज्यादा जिद्दी भी हो सकते हैं और उन्हें जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसलिए, अपने बच्चे को जबरदस्ती खाना खिलाने से बचें. इसके बजाय, नाश्ते, लंच, डिनर और स्नैक्स के लिए एक मील प्लान बनाएं. इससे हेल्दी ग्रोथ और सही वजन बढ़ाने में मदद मिलेगी. बच्चों को स्वस्थ और पौष्टिक भोजन नियमित रूप से देना उनके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे वजन बढ़ाने के लिए आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं.

खाने के समय टीवी से बचें
कई माता-पिता स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करते हैं, लेकिन बच्चों को खाने के समय टीवी देखने देना उनके लिए मजे का जरिया हो सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट अक्सर खाने के दौरान टीवी देखने या स्क्रीन इस्तेमाल करने से मना करते हैं क्योंकि इससे ध्यान कम हो सकता है और सीखने में दिक्कतें आ सकती हैं. खाते समय टीवी देखने से बच्चे इस बात पर ध्यान नहीं दे पाते कि वे क्या खा रहे हैं, जिससे उनकी खाने की आदतों और सामाजिक-भावनात्मक सेहत पर असर पड़ सकता है.
माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे बच्चों के टीवी देखने के लिए खास समय तय करें और खाने के समय टीवी बंद कर दें. क्लीवलैंड क्लिनिक के अध्ययन में यह भी कहा गया है कि मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे गैजेट्स को उनसे दूर रखना चाहिए. साथ ही, बच्चों का ध्यान इन गैजेट्स की ओर भटकने से रोकने के लिए, माता-पिता को उनके पास बैठकर उन्हें खाने-पीने की चीजों के बारे में जानकारी देनी चाहिए. यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भोजन का रंग, स्वाद और सुगंध उचित हो, ताकि भोजन के प्रति उनकी रुचि भी बढ़े.
अच्छी सेहत के लिए कैलोरी जरूरी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बच्चों को अपनी उम्र के हिसाब से वजन बढ़ाना है, तो उन्हें सबसे पहले कैलोरी से भरपूर खाना देना चाहिए. उन्हें केक, मिठाई, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजें नहीं देनी चाहिए. UAMS मनोरोग अनुसंधान संस्थान के एक अध्ययन में कहा गया है कि गाढ़े दूध, मलाई, दही और घी के अलावा, उनके आहार में विटामिन और खनिज से भरपूर फल और सब्जियां भी शामिल होनी चाहिए. अगर इन बातों की सही समझ न हो, तो संबंधित डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए और उनके बताए अनुसार बच्चों को रोजाना खाना खिलाना चाहिए.
नियमित निगरानी जरूरी
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि वजन उम्र और हाइट पर निर्भर करता है, इसलिए सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें ताकि पता चल सके कि आपके बच्चे की हाइट और उम्र के हिसाब से उसका आइडियल वजन कितना होना चाहिए. एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि बच्चे की डाइट में पौष्टिक खाना शामिल करें, जैसे आलू, घी, पनीर, फल और दालें, और हेल्दी वजन बनाए रखने के लिए रेगुलर डॉक्टर चेक-अप करवाते रहें. कम वजन वाले बच्चों को हाई-कैलोरी स्नैक्स और डेयरी प्रोडक्ट्स दें, जबकि ज्यादा वजन वाले बच्चों के लिए जंक फूड कम करें और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं.


