रांची: ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के संचालन और प्रबंधन से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मंदिर के लिए प्रस्तावित प्रबंधन स्कीम का अध्ययन करने के लिए गठित 11 सदस्यीय कमेटी फिलहाल अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं कर सकी।
सुनवाई के दौरान कमेटी की ओर से उसके कामकाज और स्वरूप को लेकर हाईकोर्ट से मार्गदर्शन मांगा गया। कमेटी यह स्पष्ट करना चाहती है कि उसे किन बिंदुओं पर अध्ययन करना है और उसकी जिम्मेदारियां किस दायरे तक होंगी।
मंदिर न्यास समिति ने मेरिट पर सुनवाई की मांग की
मामले की सुनवाई के दौरान जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति की ओर से अदालत से आग्रह किया गया कि मामले के मूल पक्ष यानी केस के मेरिट पर सुनवाई की जाए।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से मंदिर की जमीन पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी अदालत के समक्ष उठाया गया। इस पर न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने मंदिर के भू-क्षेत्र और वहां अतिक्रमण की स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी।
अदालत ने जानना चाहा कि जगन्नाथपुर मंदिर के पास कुल कितनी जमीन है और क्या उसके किसी हिस्से पर अतिक्रमण हुआ है।
पिछली सुनवाई में बनी थी 11 सदस्यीय कमेटी
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में 11 सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया था। कमेटी को झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से तैयार की गई प्रबंधन स्कीम का अध्ययन कर अदालत के सामने अपनी रिपोर्ट रखने की जिम्मेदारी दी गई थी।
दरअसल, इससे पहले अदालत ने झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड एक्ट की धारा 32 के तहत जगन्नाथपुर मंदिर के संचालन और प्रबंधन के लिए एक स्कीम तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। बोर्ड ने बाद में अपनी स्कीम अदालत में दाखिल कर दी थी।
अब कमेटी के अधिकार क्षेत्र और कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ने की उम्मीद है।
16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
जगन्नाथपुर मंदिर की जमीन और कथित अतिक्रमण से जुड़े सवालों को देखते हुए अदालत ने संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में भी संकेत दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
