Monday, October 26, 2026

चार दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 483 अंक उछला और निफ्टी 22,750 के पार.

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मुंबई, 26 अक्टूबर 2026। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर विराम लगा। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए। धातु, दूरसंचार और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला।

बीएसई का सेंसेक्स 483 अंक की तेजी के साथ 73,606 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 153 अंक चढ़कर 22,753 पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्रों में लगातार गिरावट के बाद बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली।

निचले स्तर से सेंसेक्स में जोरदार रिकवरी

सोमवार को कारोबार की शुरुआत में वैश्विक चिंताओं के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। इस दौरान सेंसेक्स गिरकर 72,514 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, दोपहर बाद खरीदारी बढ़ने से बाजार ने तेजी से वापसी की।

सेंसेक्स ने दिन के निचले स्तर से करीब 1,092 अंकों की रिकवरी की और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। निफ्टी भी संभलकर 22,750 के स्तर के पार बंद होने में सफल रहा।

मेटल, टेलीकॉम और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी

बाजार में आई तेजी में मेटल, टेलीकम्युनिकेशन और हेल्थकेयर क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। पिछली गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की।

रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1.60 प्रतिशत की गिरावट से भी बाजार की धारणा को समर्थन मिला। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 114.8 डॉलर प्रति बैरल बताया गया।

इन प्रमुख शेयरों में रही तेजी और गिरावट

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में अडानी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और आईटीसी के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और पावर ग्रिड के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट रहा कि बाजार में तेजी के बावजूद सभी प्रमुख शेयरों में एक जैसी खरीदारी नहीं हुई।

वैश्विक आर्थिक फैसलों पर निवेशकों की नजर

विशेषज्ञों के अनुसार, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सुधार देखने को मिला, लेकिन निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है। इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान से जुड़े नीतिगत फैसलों पर बाजार की नजर रहेगी।

वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों से आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।

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