नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में आए जबरदस्त उबाल के बावजूद, भारत सरकार ने घरेलू हवाई यात्रियों को बड़ी राहत दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में 100% से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद, पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू एयरलाइंस के लिए इस वृद्धि को केवल 25% तक सीमित रखने का फैसला किया है.
कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
बुधवार को एटीएफ की कीमतें पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर को पार कर गईं. दिल्ली में सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में 114.5% (1,10,703.08 रुपये) की भारी बढ़ोतरी कर इसे 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर कर दिया है. यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. हालांकि, सरकार के हस्तक्षेप के कारण घरेलू एयरलाइंस को इस पूरे बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा.
केवल 25% की आंशिक बढ़ोतरी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घोषणा की है कि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के अनुसार एटीएफ की कीमतों में 100% से अधिक की वृद्धि होनी थी, लेकिन घरेलू उड़ानों के लिए इसे केवल 25% तक सीमित रखा गया है. मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (PSU OMCs) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ परामर्श के बाद यह निर्णय लिया है ताकि आम नागरिकों पर हवाई किराए का बोझ न बढ़े.
मेट्रो शहरों में नई दरें (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी)
संशोधित दरों के बाद दिल्ली में एटीएफ की कीमत ₹1,04,927 प्रति किलोलीटर हो गई है. वहीं कोलकाता में यह बढ़कर ₹1,09,450, मुंबई में ₹98,247 और चेन्नई में ₹1,09,873 प्रति किलोलीटर पर पहुंच गई है. गौरतलब है कि भारत में 2001 से एटीएफ की कीमतें विनियंत्रित हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर हर महीने इनकी समीक्षा की जाती है.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर कोई राहत नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल घरेलू परिचालन तक सीमित है. अंतरराष्ट्रीय रूट पर उड़ान भरने वाले विमानों को ईंधन के लिए पूरी वैश्विक कीमत चुकानी होगी. सरकार के बयान के अनुसार, “विदेशी रूटों के लिए एटीएफ की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप पूरी वृद्धि लागू होगी, जैसा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में होता है.”
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी हुए महंगे
एक तरफ जहां हवाई ईंधन में राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ 1 अप्रैल से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भारी उछाल आया है. दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹195.50 बढ़कर ₹2,078.50 हो गई है. कोलकाता में इसमें ₹218 की वृद्धि दर्ज की गई है. हालांकि, घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में यह ₹913 प्रति सिलेंडर पर स्थिर है.
क्यों गहराया संकट?
इस संकट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया गया है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है. इसकी नाकेबंदी की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतों में यह अप्रत्याशित उछाल देखा जा रहा है. सरकार के इस हस्तक्षेप से एयरलाइन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो पहले से ही परिचालन लागत में वृद्धि से जूझ रहा था.


