Thursday, August 20, 2026

खनिज कानून को लेकर जयराम महतो ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, संशोधन वापस लेने की मांग.

Share

रांची: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर इस संशोधन पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र से विधेयक को वापस लेने का आग्रह भी किया है।

जयराम महतो का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का असर झारखंड की खनिज आय और राज्य के वित्तीय हितों पर पड़ सकता है। उनका दावा है कि इससे विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

खनिज सेस को लेकर जताई चिंता

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जयराम महतो ने खनिज से मिलने वाले सेस को राज्य की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बताया। उनका कहना है कि कानून में बदलाव के बाद झारखंड को इस मद से मिलने वाले राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने पत्र में बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए झारखंड सरकार ने खनिज सेस के माध्यम से लगभग 13,800 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनके अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच इस मद से करीब 4,400 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो चुकी है।

विस्थापन और प्रदूषण का भी उठाया मुद्दा

जयराम महतो ने खनन गतिविधियों से प्रभावित झारखंड के लोगों का मुद्दा भी प्रधानमंत्री के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि खनिज परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में लोगों की जमीन ली गई है और कई परिवारों को विस्थापन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।

उनके मुताबिक, खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने प्रदूषण समेत कई चुनौतियां भी हैं। ऐसे में राज्य को खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व में कमी आने पर प्रभावित क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

कोयला रॉयल्टी का पुराना विवाद भी याद दिलाया

JLKM अध्यक्ष ने केंद्र और झारखंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे कोयला रॉयल्टी विवाद का भी उल्लेख किया। पत्र के अनुसार, झारखंड सरकार केंद्र से कोयला रॉयल्टी के मद में लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का दावा करती रही है।

जयराम महतो ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है, लेकिन खनिज संपदा से जुड़े वित्तीय अधिकारों और राजस्व को लेकर राज्य के सामने लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं।

प्रधानमंत्री से दोबारा विचार करने की अपील

जयराम महतो ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि झारखंड की आर्थिक स्थिति, खनिज संसाधनों पर राज्य की निर्भरता और प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संशोधन विधेयक की समीक्षा की जाए।

उन्होंने मांग की कि राज्य के वित्तीय हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए विधेयक को वापस लेने पर विचार किया जाए। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से क्या रुख सामने आता है, इस पर झारखंड की राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

Read more

Local News