Friday, April 10, 2026

कोलेस्ट्रॉल का इलाज करने और हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए सप्लीमेंट्स लेना समय और पैसे की बर्बादी है…

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फिश ऑयल सप्लीमेंट्स शरीर के लिए सबसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स में से एक है. ये हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक से काम करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा, दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में फिश ऑयल सप्लीमेंट्स का सेवन करना बहुत जरूरी है. फिश ऑयल सप्लीमेंट्स ओमेगा-3 फैटी एसिड (EPA और DHA) शरीर में सूजन कम करने, खून के थक्के को बैलेंस करने और खून की नसों को हेल्दी रखने वाले हॉर्मोन बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं. फिश ऑयल सप्लीमेंट्स एंटी-इंफ्लेमेटरी के तौर पर काम करते हैं और दिल की सेहत को बढ़ावा देते हैं.

ओमेगा-3 फैटी एसिड फिश ऑयल, विशेष रूप से ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में अत्यधिक प्रभावी हैं, लेकिन वे स्टैटिन का सीधा विकल्प नहीं हैं, क्योंकि वे LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) को बहुत कम नहीं करते हैं. ये मुख्य रूप से हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए.

सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करना समय और पैसे की बर्बादी है
अमेरिकियों के बीच फिश ऑयल सप्लीमेंट्स काफी लोकप्रिय हैं, अनुमानों के मुताबिक, हर पांच में से एक बुज़ुर्ग अपने दिल की सेहत के लिए फिश ऑयल लेता है. लेकिन, नई कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस के सह-लेखक और बोस्टन यूनिवर्सिटी के चोबैनियन एंड एवेडिसियन स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के प्रोफेसर, डोनाल्ड एम. लॉयड-जोन्स, MD, ScM, FAHA के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल का इलाज करने या एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर (ASCVD) रिस्क को कम करने के लिए फिश ऑयल सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करने से कोई फायदा नहीं होता है. सबूत बताते हैं कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिलने वाला फिश ऑयल कोलेस्ट्रॉल को कम नहीं करता है.

In the new guidelines related to cholesterol, fish oil and other supplements are advised not to take

उन्होंने कहा कि कई स्टडीज से पता चला है कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं, जैसे कि स्टैटिन, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के रिस्क को कम करने में ओवर-द-काउंटर मिलने वाले फिश ऑयल सप्लीमेंट्स की तुलना में ज्यादा असरदार होती हैं. लॉयड-जोन्स ने एक मीडिया संस्था को बताया कि इस बात के काफी सबूत मौजूद हैं, जो साफ तौर पर दिखाते हैं कि कोलेस्ट्रॉल का इलाज करने और दिल का दौरा या स्ट्रोक के जोखिम को कम करने की कोशिश में सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करना समय और पैसे की बर्बादी है.

फिश ऑयल दिल की सेहत को और भी खराब कर सकता है
ह्यूस्टन स्थित यूटीहेल्थ के मैकगवर्न मेडिकल स्कूल में कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन के प्रोफेसर जॉन पी. हिगिंस, MD ने कहा कि कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि अधिक मात्रा में फिश ऑयल के सप्लीमेंट लेने से हानिकारक LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और एट्रियल फिब्रिलेशन (AFib – अनियमित धड़कन) का खतरा हो सकता है. हालिया शोध के अनुसार, बिना हृदय रोग वाले लोगों में भी इसके नियमित सेवन से AFib का जोखिम 13 फीसदी तक बढ़ सकता है. डॉ. जॉन पी. हिगिंस ने कहा कि उन्होंने अपने मरीजों में मछली के तेल के ये प्रभाव देखे हैं.

हिगिंस ने एक मीडिया संस्था को एक ईमेल में बताया कि सप्लीमेंट्स के साथ सबसे बड़ी समस्या उनका ‘जहरीला’ होना नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाला झूठा भरोसा है. उनका कहना है कि लोग सप्लीमेंट्स को स्टेटिन जैसी प्रमाणित दवाओं का ‘प्राकृतिक’ विकल्प मान लेते हैं, जिससे सही डॉक्टरी इलाज में सालों की देरी हो जाती है. इस दौरान शरीर में LDL-C (खराब कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ा रहता है, जो अंदरूनी नुकसान पहुंचाता रहता है और प्रमाणित इलाज में देरी करने से भविष्य में हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का खतरा काफी बढ़ जाता है.

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डॉक्टर का बताया हुआ फिश ऑयल अभी भी कुछ मरीजों को लेने की सलाह दी जाती है.

यह नई गाइडलाइन सिर्फ उन सप्लीमेंट्स पर लागू होती है जो डॉक्टर की सलाह के बिना लिए जाते हैं. ओवर-द-काउंटर फिश ऑयल, इकोसापेंटेनोइक एसिड, अभी भी कुछ ज्यादा जोखिम वाले लोगों में दिल की बीमारी के इलाज के तौर पर लेने की सलाह दी जाती है. इकोसापेंटा एथिल ओमेगा-3 फैटी एसिड EPA का एक शुद्ध, हाई-डोज वाला रूप है जो स्टैटिन के साथ मिलकर काम करता है.

डॉक्टर की लिखी दवाओं के उलट, सप्लीमेंट्स की सुरक्षा और असर के लिए उतनी सख्ती से जांच नहीं की जाती है. ओवर-द-काउंटर फिश ऑयल सप्लीमेंट्स में गंदगी हो सकती है और वे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में असरदार नहीं होते हैं. लॉयड-जोन्स ने कहा कि डॉक्टर की सलाह के बिना लिए गए फिश ऑयल सप्लीमेंट्स में जरूरी चीज (EPA) का लेवल कम होता है, और कोई भी फायदा पाने के लिए हर दिन कम से कम 10 टैबलेट लेने की जरूरत होगी

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ओमेगा-3 फैटी एसिड का सोर्स
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड मछली, ऑलिव ऑयल, अलसी के बीज, कुकिंग ऑयल और ताजी हरी सब्जियों जैसी खाने की चीजों में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि ये एसिड चिया सीड्स, अखरोट, सोयाबीन और चीज जैसी खाने की चीजों में भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.

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