रांची: झारखंड मंत्रालय में शुक्रवार को आयोजित कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभागीय योजनाओं की प्रगति का आकलन किया और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। बैठक में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसान हित से जुड़ी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से राज्य के प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुंचे।
हर जिले में विकसित होगी मॉडल किसान पाठशाला
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक मॉडल किसान पाठशाला स्थापित की जाए, जहां किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और नई कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा सके। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थानों के सहयोग से तकनीकी जानकारी किसानों तक पहुंचाने और पहले से संचालित किसान पाठशालाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी बल दिया।
दलहन, मिलेट और कम पानी वाली फसलों को मिलेगा प्रोत्साहन
कम वर्षा वाले क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने दलहन और मोटे अनाज (मिलेट) की खेती को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही कृषि योग्य परती और बंजर भूमि की पहचान कर उसे खेती के दायरे में लाने की योजना बनाने को कहा। विशेष रूप से पलामू प्रमंडल सहित कम वर्षा वाले जिलों में जल संरक्षण, जैविक खेती और व्यावसायिक कृषि को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
सौर सिंचाई पंप और किसान समृद्धि योजना पर फोकस
बैठक में किसान समृद्धि योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सिंचाई लागत कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और बिजली पर निर्भरता भी घटेगी। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कृषि व्यापार मेले और मॉडल गांव की पहल
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्यस्तरीय कृषि व्यापार मेले की तर्ज पर सभी प्रमंडलों में भी कृषि मेले आयोजित किए जाएं ताकि किसानों को आधुनिक तकनीक, कृषि उपकरण और बाजार संबंधी जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्रत्येक जिले में एक गांव या पंचायत को कृषि मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया, जहां मिट्टी परीक्षण, सिंचाई, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का समग्र लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
मशरूम, मधुमक्खी पालन और महिला समूहों को बढ़ावा
कृषि आधारित आय के नए स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, महिला किसान उत्पादक समूहों को प्रोत्साहित करने और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। इस क्षेत्र से जुड़े किसानों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।
पशुपालन और मत्स्य पालन को मिलेगा नया प्रोत्साहन
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादन, बकरी, सूकर और कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पशुओं के नियमित टीकाकरण, आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाओं और प्रजनन केंद्रों को मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही खनन प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालन आधारित आजीविका मॉडल विकसित करने और केंद्रीय कारागारों में डेयरी फार्म की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा।
उन्होंने दुग्ध उत्पादकों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें मिल्क फेडरेशन से जोड़ने, प्रमंडल स्तर पर पशु मेलों के आयोजन तथा मत्स्य पालन को ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का प्रभावी माध्यम बनाने पर भी जोर दिया।
तकनीक, बाजार और सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से किसानों को मौसम आधारित सलाह, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, फसल विविधीकरण और बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने जिला एवं प्रखंड स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
सहकारिता विभाग की समीक्षा में लैम्प्स और पैक्स को अधिक सक्रिय बनाने, कृषि उत्पादों की खरीद प्रणाली को मजबूत करने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा बीज वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। साथ ही प्रमुख सहकारी समितियों को उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों से संवाद
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गढ़वा की किसान पाठशाला, दुमका के किसान सुरेश मरांडी तथा जामताड़ा के कृषि अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने खेती की वर्तमान स्थिति, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ और काजू की खेती की संभावनाओं की जानकारी ली। साथ ही कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलों का चयन करने की सलाह दी।


