Tuesday, August 25, 2026

कार्बोसुल्फान पर देशभर में प्रतिबंध की तैयारी, केंद्र ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक कार्बोसुल्फान को लेकर बड़ा कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए ड्राफ्ट गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है। यह कीटनाशक खास तौर पर धान, कपास और कई बागवानी फसलों में कीट नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

सरकार का प्रस्तावित फैसला स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति और पंजीकरण समिति की समीक्षा में कार्बोसुल्फान के इस्तेमाल से जुड़े गंभीर खतरे सामने आने की बात कही गई है।

मानव स्वास्थ्य को लेकर चिंता

सरकारी समीक्षा के मुताबिक कार्बोसुल्फान अत्यधिक विषैला रसायन है। शरीर में पहुंचने के बाद इससे जुड़े विषैले प्रभाव तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। खेतों में कीटनाशक के छिड़काव के दौरान किसानों और कृषि श्रमिकों के इसके संपर्क में आने को लेकर विशेष चिंता जताई गई है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्बोसुल्फान शरीर में कार्बोफ्यूरन में परिवर्तित हो सकता है। विशेषज्ञों ने इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को देखते हुए इसके उपयोग पर रोक की सिफारिश की है।

पक्षियों और जलीय जीवों पर भी असर

सरकार की समीक्षा में केवल मानव स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को भी प्रतिबंध के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। उपलब्ध आकलन के अनुसार यह रसायन पक्षियों, मधुमक्खियों और जलीय जीवों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है।

इसी वजह से इसके व्यापक इस्तेमाल को जारी रखने के बजाय सुरक्षित कृषि विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

जनवरी में शुरू हुई थी समीक्षा प्रक्रिया

कृषि मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को कार्बोसुल्फान की सुरक्षा और उपयोग की समीक्षा के लिए समिति गठित की थी। समिति ने 12 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके बाद संबंधित समितियों की सिफारिशों के आधार पर कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया।

प्रतिबंध लागू होने पर क्या बदलेगा?

प्रस्तावित प्रतिबंध प्रभावी होने के बाद कार्बोसुल्फान के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन और इस्तेमाल पर रोक लग जाएगी। इससे इस रसायन से जुड़े कारोबार और कृषि उपयोग पर व्यापक असर पड़ेगा।

ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार संबंधित कंपनियों को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र निर्धारित अवधि के भीतर वापस करने होंगे। नियमों का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी प्रस्तावित है।

केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को भी प्रतिबंध लागू होने के बाद इसकी निगरानी और प्रभावी अमल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

किसानों के लिए सुरक्षित विकल्पों पर जोर

सरकार के इस कदम से कृषि क्षेत्र में कम जोखिम वाले कीट नियंत्रण उपायों और वैकल्पिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम नियम और प्रतिबंध की प्रभावी तिथि संबंधित सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

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