कटिहार रेल मंडल में नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) का काम पूरा होने के बावजूद अस्थायी रूप से रद्द की गई महत्वपूर्ण पैसेंजर और इंटरसिटी ट्रेनों को दोबारा बहाल नहीं किया गया है. रेलवे के इस रवैए से सीमांचल और उत्तर बंगाल के हजारों दैनिक यात्रियों में भारी नाराजगी है.
कटिहार रेल मंडल में रेलवे द्वारा विकास और आधुनिकीकरण के नाम पर नॉन-इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य पूरा होने का दावा किए जाने के बाद भी रेल सेवाओं की कड़ियां पटरी पर नहीं लौट सकी हैं. रविवार को भी सिलीगुड़ी-कटिहार और मालदा रूट पर चलने वाली कई लाइफलाइन ट्रेनें पूरी तरह निरस्त रहीं. ट्रेनों के परिचालन संबंधी आधिकारिक ऐप और रेलवे की सूचना प्रणाली में भी इन प्रमुख गाड़ियों को रद्द प्रदर्शित किया जा रहा है, जिससे ठाकुरगंज, पोठिया और किशनगंज प्रक्षेत्र के यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
दैनिक और इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेनें लगातार हो रहीं निरस्त
रेलवे द्वारा जारी सूचना और इंफ्रास्ट्रक्चर ऐप के मुताबिक रविवार को भी सीमांचल की निम्नलिखित मुख्य ट्रेनें ट्रैक से गायब रहीं:
- डेमू ट्रेनें: 75744 सिलीगुड़ी-कटिहार डेमू, 75743 कटिहार-सिलीगुड़ी डेमू, 75719 मालदा कोर्ट-सिलीगुड़ी डेमू और 75720 सिलीगुड़ी-मालदा कोर्ट डेमू का परिचालन पूरी तरह बंद रहा.
- इंटरसिटी ट्रेनें: लंबी दूरी और एक्सप्रेस कनेक्टिविटी देने वाली 15720 कटिहार इंटरसिटी एक्सप्रेस तथा 15719 सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस भी रद्द कड़ियों की सूची में शामिल रहीं.
नौकरीपेशा और छात्रों की टूटी कमर; महंगे सड़क सफर की मजबूरी
ट्रेनों की लगातार बंदी के कारण स्थानीय जनजीवन की आर्थिक कड़ियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. ठाकुरगंज, तैयबपुर, पोठिया, अलुआबाड़ी रोड, किशनगंज और कटिहार के बीच प्रतिदिन सफर करने वाले दैनिक रेल यात्री, छात्र, छोटे कारोबारी और नौकरीपेशा लोग इस सुस्ती से सबसे अधिक त्रस्त हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सुलभ रेल सेवा न होने के कारण उन्हें निजी बसों और महंगे सड़क परिवहन का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनके समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी हो रही है.
स्पष्ट समय-सीमा जारी करे रेलवे प्रशासन
“एनआई कार्यों के समय रेलवे ने बेहतर भविष्य का हवाला देकर हमसे सहयोग मांगा था. अब जब कटिहार में ब्लॉक और तकनीकी काम खत्म हो चुके हैं, तो फिर 75744, 75743, 15719 और 15720 जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों की बहाली में आखिर देरी क्यों की जा रही है?”
स्थानीय रेल उपभोक्ता मंचों और बुद्धिजीवियों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि रद्द की गई ट्रेनों की बहाली की सटीक समय-सीमा (टाइमलाइन) जल्द से जल्द सार्वजनिक की जाए. यात्रियों का आरोप है कि इस असमंजस के कारण लोग अपनी अग्रिम यात्राओं का संधारण नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए सीमांचल क्षेत्र के रेल हितों को ध्यान में रखते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) को इस पर अविलंब संज्ञान लेना चाहिए.


