रांची: राजधानी रांची के ग्रामीण इलाकों में अफीम तस्करों के खिलाफ पुलिस का साथ देने के लिए अब ग्रामीण भी आगे आए हैं. डीआईजी सह रांची एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा की पहल काम आई है. ग्रामीणों को अब समझ में आने लगा है कि अफीम खेती के साथ-साथ उनकी पूरी नस्ल को बर्बाद कर रही है.
अफीम के खिलाफ मुहिम में ग्रामीण शामिल
अफीम के खिलाफ चल रही लड़ाई में अब राजधानी रांची के सैकड़ों ग्रामीण भी पुलिस के साथ आ गए हैं. रांची एसएसपी की पहल पर इसकी शुरुआत बुंडू इलाके से हुई है. रांची के सीनियर एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि रांची पुलिस अफीम की फसल को नष्ट करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है. इसके लिए ग्रामीणों के बीच जोरदार जागरूकता अभियान भी चलाया गया, जिसका अब फायदा मिल रहा है और कई इलाकों में ग्रामीण खुद अफीम की फसल को नष्ट करने के लिए आगे आ रहे हैं. रांची के सीनियर एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 1 महीने के दौरान अकेले रांची में 400 एकड़ में लगी अफीम की फसल को नष्ट किया गया है.
ग्राम सभा में फैसला
दरअसल, रांची पुलिस की ओर से ग्रामीणों को यह समझाने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई गई है कि अफीम की वजह से उन्हें कितना नुकसान हो रहा है. एक ओर जहां ग्रामीणों की जमीन बंजर हो रही है, वहीं दूसरी ओर अफीम की वजह से जलस्रोत खराब हो रहे हैं. अफीम की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान युवा पीढ़ी को हो रहा है. जागरूकता अभियान के चलते ग्रामीण ग्राम सभा के जरिए अफीम के खेतों की पहचान कर रहे हैं और फिर उन्हें मिलकर नष्ट कर रहे हैं.
अब तक 400 एकड़ खेती नष्ट
राजधानी रांची में अफीम तस्करों ने कई एकड़ जमीन पर चोरी-छिपे अफीम की फसल उगा रखी है. रांची पुलिस और स्पेशल ब्रांच से मिले इनपुट के आधार पर रांची के सीनियर एसपी चंदन कुमार सिन्हा के नेतृत्व में अफीम की फसल को नष्ट करने के लिए जोरदार अभियान चलाया गया है. रांची पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि अब तक करीब 400 एकड़ में लगी अफीम की फसल को नष्ट किया जा चुका है. बची हुई फसल को भी पहचान कर नष्ट करने का काम शुरू कर दिया गया है.
रांची के सीनियर एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि स्पेशल ब्रांच से मिले इनपुट के अलावा हमारी पुलिस को भी अफीम के बारे में कई इनपुट मिले हैं, जिसके आधार पर युद्धस्तर पर कार्रवाई की जा रही है. अफीम की फसल को नष्ट किया जा रहा है. इस बार अफीम की फसल को पकने का मौका नहीं दिया गया है. पहली बार अफीम की फसल को नष्ट करने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है.
रांची के सीनियर एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि अफीम एक बेहद खतरनाक नशा है. इसकी टहनियों और पत्तियों का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है, इसलिए इसे पूरी तरह से नष्ट किया जा रहा है.
नक्सली गतिविधि में इस्तेमाल होता है अफीम का पैसा
झारखंड में उगाई जाने वाली अफीम की फसल के खतरनाक होने के पीछे कई कारण हैं. पहला कारण यह है कि अफीम की फसल से करोड़ों रुपए की कमाई होती है, जिसका एक बड़ा हिस्सा नक्सलियों और उग्रवादियों तक पहुंचता है, जिसका इस्तेमाल वे पुलिस के खिलाफ करते हैं. अफीम एक ऐसी मादक फसल है जिसके पौधे का हर हिस्सा नशे के लिए इस्तेमाल होता है. अफीम का इस्तेमाल ब्राउन शुगर जैसी जानलेवा मादक पदार्थ बनाने में होता है, जबकि इसके डोडे का इस्तेमाल भी नशे के लिए होता है. यही कारण है कि झारखंड में अफीम की फसल के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया जा रहा है.


