नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के घरेलू ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. आपूर्ति बाधित होने की आशंका और एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बुकिंग में आए उतार-चढ़ाव को देखते हुए केंद्र सरकार और गैस वितरण कंपनियां अब ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं. ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां रजिस्ट्रेशन फीस माफी से लेकर मुफ्त गैस तक के लुभावने ऑफर्स दे रही हैं.
एलपीजी बुकिंग में गिरावट और पैनिक की स्थिति
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के रुझानों में काफी अस्थिरता देखी गई है. 13 मार्च को देश भर में लगभग 88.8 लाख सिलेंडरों की बुकिंग हुई थी, जो 14 मार्च को गिरकर 77 लाख पर आ गई. इस गिरावट का मुख्य कारण बाजार में फैली घबराहट (Panic) को माना जा रहा है. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और डिजिटल बुकिंग का आंकड़ा 87 प्रतिशत तक पहुंच गया है. कालाबाजारी रोकने के लिए 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं.
गैस कंपनियों के ‘धमाका’ ऑफर्स
एलपीजी की झंझटों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रमुख गैस कंपनियों ने विशेष रियायतों की घोषणा की है:
- IGL (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड): दिल्ली-एनसीआर के उपभोक्ताओं के लिए IGL ने 31 मार्च 2026 तक नया कनेक्शन लेने पर ₹500 मूल्य की फ्री गैस देने का वादा किया है.
- MGL (महानगर गैस लिमिटेड): मुंबई और आसपास के इलाकों में घरेलू ग्राहकों के लिए ₹500 का पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है.
- GAIL Gas: गेल गैस भी अपने नए घरेलू कनेक्शनों पर ₹500 की मुफ्त गैस का लाभ दे रही है.
- कमर्शियल ग्राहकों के लिए राहत: कमर्शियल उपयोग के लिए BPCL और अन्य कंपनियों ने ₹1 लाख से ₹5 लाख तक के सिक्योरिटी डिपॉजिट को खत्म कर दिया है, जिससे छोटे और बड़े व्यवसायों के लिए पीएनजी अपनाना बेहद सस्ता हो गया है.
PNG के फायदे और नए नियम
पीएनजी न केवल सुरक्षित है, बल्कि यह एलपीजी की तुलना में सस्ती भी पड़ती है. इसमें सिलेंडर खत्म होने या डिलीवरी के इंतजार का डर नहीं रहता. हालांकि, सरकार ने नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है: यदि आप अपने घर में पीएनजी कनेक्शन लगवाते हैं, तो आपको अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्विच न केवल उपभोक्ताओं की जेब बचाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के समय देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा.


