साल दर साल बीत गये पर पूर्णिया में एम्स की मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी. यही वजह है कि एम्स की मांग को लेकर लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी सरकार तक अपनी आवाज पहुंचा रहे हैं, जबकि पटना और दिल्ली के सदन में भी आवाज उठायी जा रही है.
पूर्णिया: भारत-नेपाल और बिहार-बंगाल की अलग-अलग सीमाओं से जुड़े जिलों का पूर्णिया प्रमंडलीय मुख्यालय है, जहां बंगाल और कोसी प्रमंडल के जिलों से भी गंभीर रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं. प्रबुद्ध नागरिक मानते हैं कि इस लिहाज से यहां एम्स जैसा अति आधुनिक अस्पताल खुल जाने से बड़ी संख्या में आम लोगों को भला होगा और उन्हें बेहतर इलाज भी मिल पाएगा. चूंकि इस इलाके में बड़ी संख्या गरीबों की आबादी है इसलिए इस तबके को इलाज में काफी फायदा होगा. अभी इस इलाके में बेहतर इलाज की व्यवस्था का सर्वथा अभाव बना हुआ है.
बाहर जाकर सब इलाज करा सके, यह संभव नहीं
पटना और दिल्ली जाकर इलाज कराना गरीबों के लिए संभव नहीं है और यही कारण है कि रेफर किये जाने के बावजूद इस तबके के लोग बाहर नहीं जाते और बीमार माता-पिता या रिश्तेदारों को भगवान भरोसे छोड़ देते हैं. इससे समय से पहले वे काल का ग्रास बन जाते हैं.
सरकार की खामोशी से मिल रही आंदोलन को हवा
सही मायने में एम्स पूर्णिया की जरूरत है और इसकी स्थापना के लिए सरकार को शीघ्र पहल करनी चाहिए. पूर्णिया के नागरिकों का मानना है कि इस मामले में सरकार की उदासीनता एक बार फिर आंदोलन को हवा दे रही है. एम्स मामले में सरकार की खामोशी के कारण युवा गोलबंद भी होने लगे हैं. इस गोलबंदी में युवा अपने साथ डाक्टर, प्राध्यापक, अधिवक्ता, शिक्षक और रिटायर्ड पदाधिकारियों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
युवाओं का कहना है कि जब दिल्ली और पटना के सदन में उठी आवाज भी नहीं सुनी जाए तो आम आदमी सड़क पर आने के लिए विवश हो जाता है और यही स्थिति बन रही है. दरअसल, पूर्णिया के तमाम जनप्रतिनिधि भी एम्स के पक्षधर हैं जो समय-समय पर अपने स्तर से सदन में मांग भी उठाते रहे हैं. नागरिकों का कहना है कि एम्स की स्थापना के लिए सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
इस मामले को तूल दे रहे युवाओं का कहना है कि युवाओं ने कहा कि सीमांचल का यह इलाका बिहार का पिछड़ा क्षेत्र है. यहां एम्स ही नहीं, विकास के कई काम किए जाने की आवश्यकता है. यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पूर्णिया पूर्वोत्तर के राज्यों का सेन्टर प्वाइंट है. बेहतर इलाज के लिए यहां से तीन सौ किमी. दूर पटना जाने की जरूरत पड़ती है. एक तो गरीब और मध्यम परिवारों के लोग हिम्मत नहीं जुटा पाते और कभी किसी जुगाड़ से निकल भी गये तो जुगत जुटाने के चक्कर में पटना पहुंचने से पहले जान चली जाती है.
बंगाल समेत सीमांचल के नौ जिलों को मिलेगा लाभ
पूर्णिया जिला नेपाल व पश्चिम बंगाल की सीमा पर बसा हुआ है. कोसी प्रमंडल के जिले में भी इससे सटकर बसे हुए हैं. झारखंड अलग होने के बाद बिहार में दूसरा सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल नहीं है. पूर्णिया और कोसी प्रमंडल राज्य की बड़ी आबादी को कवर करता है. पूर्णिया इन सभी जिलों का केंद्र है और इस दृष्टि से भी एम्स के लिए पूर्णिया पूरी तरह से उपयुक्त है. नागरिकों का कहना है कि पूर्णिया में एम्स जैसा सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल खुलने से कोशी और पूर्णिया के नौ जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य बंगाल के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के नागरिकों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी.
पूर्णिया के बुद्धिजीवियों का कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के कारण सीमांचल में फैलती महामारी, कैंसर और अन्य सघन रोगों के मकड़जाल ने कोसी वासियों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं होने से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को या तो पटना या सिलिगुडी जाना पड़ता है. इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. आमलोग को बेहतर इलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है और यही वजह है कि पूर्णिया में एम्स निर्माण की मांग जोर पकड़ रही है.



