एथलीट हार्ट (एथलेटिक हार्ट सिंड्रोम) रेगुलर और इंटेंस फिजिकल ट्रेनिंग के लिए एक नेचुरल कार्डियक रिस्पॉन्स है. यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि इंटेंस एंड्योरेंस या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के कारण हार्ट के साइज और फंक्शन में होने वाले पॉजिटिव बदलावों का एक सेट है. सैफी अस्पताल मुंबई में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रुचित शाह का कहना है कि असल में ‘एथलीट्स हार्ट एक ऐसी स्थिति है जो लगभग 1-2 प्रतिशत कॉम्पिटिटिव एथलीट्स में देखी जाती है और यह लंबे समय तक चलने वाली, हेवी फिजिकल ट्रेनिंग का नतीजा होती है.
जिस तरह ट्रेनिंग और एक्सरसाइज से कंकाल की मांसपेशियां बड़ी और मोटी हो जाती हैं, उसी तरह दिल की मांसपेशियां भी बड़ी और मोटी हो सकती हैं. जब कोई व्यक्ति हेवी एक्सरसाइज करता है, तो शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत, और उसे पहुंचाने के लिए जरूरी खून की मात्रा, काफी बढ़ जाती है. ऐसा अक्सर कॉम्पिटिटिव एथलीट्स की सख्त ट्रेनिंग के दौरान देखा जाता है. इस बढ़ी हुई जरूरत के जवाब में, दिल की मांसपेशियां ‘कंडीशन्ड’ हो जाती हैं और समय के साथ मोटी हो जाती हैं. इस स्थिति को ‘एथलीट हार्ट’ या फिजियोलॉजिकल कार्डियक हाइपरट्रॉफी कहा जाता है.
डॉ. रुचित शाह के मुताबिक, जब दिल की मसल्स मोटी हो जाती हैं (खासकर बाएं वेंट्रिकल में) तो इस कंडीशन को लेफ्ट वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी (LVH) कहते हैं. यह मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि दिल (खासकर बाएं वेंट्रिकल) को पूरे शरीर में ऑक्सीजन वाला खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जैसे-जैसे दीवारें मोटी होती जाती हैं, वेंट्रिकल की अंदरूनी कैविटी का साइज कम होता जाता है. इससे बाएं वेंट्रिकल की खून भरने की कैपेसिटी थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि, ‘एथलीट हार्ट’ आमतौर पर कोई नेगेटिव कंडीशन नहीं है, हेल्दी लोगों में, इससे कोई बीमारी या गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम नहीं होती हैं.
कंडीशंड हार्ट रेट एथलीट हार्ट की विशेषताओं में से एक है. यह लगातार ट्रेनिंग की वजह से विकसित होता है, जिससे दिल ज्यादा बेहतर तरीके से काम करने लगता है. जिन लोगों का दिल एथलीट हार्ट वाला होता है, उनमें आमतौर पर कोई लक्षण या गंभीर चेतावनी वाले संकेत नहीं दिखते और उन्हें इस स्थिति के लिए किसी खास इलाज की जरूरत नहीं होती है.
एथलीट हार्ट और HOCM हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी के बीच अंतर
डॉ. रुचित शाह का कहना है कि ‘एथलीट हार्ट’ और HOCM (हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी) दोनों में, दिल की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं. हालांकि, एथलीट हार्ट एक हेल्दी, नेचुरल अडैप्टेशन है, जबकि HOCM एक जेनेटिक बीमारी है जिससे अचानक मौत हो सकती है. HOCM एक गंभीर बीमारी है, जिसमें हार्ट मसल्स मोटी हो जाती हैं और लेफ्ट वेंट्रिकुलर कैविटी संकरी हो जाती है. इस अत्यधिक मोटाई के कारण लेफ्ट वेंट्रिकल का आउटफ्लो ट्रैक्ट भी ब्लॉक हो सकता है. HOCM वाले एथलीटों में अचानक कार्डियक अरेस्ट और मौत का खतरा होता है, जबकि एथलीट हार्ट वाले एथलीटों में ऐसा नहीं होता है.
डॉ. रुचित शाह का कहना है कि एथलीट हार्ट और कार्डियोमायोपैथी के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि दोनों में हार्ट मसल्स का मोटा होना जैसे लक्षण दिखते हैं. हालांकि, कार्डियोमायोपैथी एक आनुवंशिक या पैथोलॉजिकल बीमारी है, जबकि एथलीट हार्ट हेवी एक्सरसाइज के प्रति एक सामान्य शारीरिक अनुकूलन है. दोनों स्थितियों के बीच अंतर इस तरह किया जा सकता है जैसे कि…
- एथलीट के दिल में, अक्सर बाएं वेंट्रिकल की कैविटी बड़ी हो जाती है ताकि दिल ज्यादा खून पंप कर सके. इसके उलट, हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM) में, कैविटी का साइज सामान्य से काफी छोटा हो जाता है.
- एथलीट हार्ट वाले लोगों में दिल का डायस्टोलिक फंक्शन सामान्य रहता है. कार्डियोमायोपैथी में अक्सर डायस्टोलिक डिसफंक्शन (दिल की मांसपेशियों का सख्त होना और आराम न कर पाना) के लक्षण दिखाई देते हैं.
- एथलीट हार्ट में, एक्सरसाइज के दौरान दिल की पंपिंग क्षमता बढ़ जाती है. डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी में एक्सरसाइज के दौरान आम तौर पर यह क्षमता नहीं बढ़ती है.
- अगर इकोकार्डियोग्राफी से स्थिति साफ नहीं होती है, तो कार्डियक मैग्नेटिक रेजोनेंस (CMR) इमेजिंग का इस्तेमाल ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ के तौर पर किया जाता है. यह टेस्ट सही-सही पता लगा सकता है कि दिल का बढ़ना एथलीट की ट्रेनिंग का नतीजा है या किसी बीमारी का.
- अगर एथलीट कुछ हफ्तों या महीनों तक एक्सरसाइज करना बंद कर देता है (डीकंडीशनिंग), तो एथलीट हार्ट के कारण बढ़ी हुई मांसपेशियां वापस सामान्य साइज में आ सकती हैं. कार्डियोमायोपैथी के मामलों में ऐसा नहीं होता है.
ध्यान देने वाली बात
डॉ. रुचित शाह के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में, ‘एथलीट हार्ट’ कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर का एक सामान्य और स्वस्थ बदलाव है. आम तौर पर, जो लोग पहले से स्वस्थ हैं, उनमें इसके कोई लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं दिखतीं. हालांकि, डॉक्टर ‘एथलीट हार्ट’ और दिल की कुछ गंभीर बीमारियों के बीच फर्क समझने पर जोर देते हैं, क्योंकि इनके लक्षण एक जैसे हो सकते हैं. दिल की कुछ बीमारियों की वजह से दिल की मांसपेशियां मोटी या बड़ी हो सकती हैं, जिससे जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए, अगर किसी व्यक्ति में चेतावनी वाले संकेत या चिंताजनक लक्षण दिखते हैं, तो मेडिकल जांच और टेस्ट करवाना सही रहता है.


