नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत को लेकर SBI Research की एक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। रिपोर्ट में छात्रों के अधिकारों से लेकर परीक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), शिक्षा बजट और शिक्षकों की उपलब्धता तक विभिन्न मुद्दों पर सुधार की सिफारिश की गई है।
शिक्षा के अधिकार को लेकर संविधान में बदलाव का सुझाव
SBI Research ने सुझाव दिया है कि छात्रों को उच्च शिक्षा के दौरान सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 21 में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।
रिपोर्ट में ‘मुफ्त और निष्पक्ष’ उच्च शिक्षा की अवधारणा पर जोर दिया गया है। इसमें मुफ्त शिक्षा का अर्थ केवल फीस से राहत नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को धोखाधड़ी, भेदभाव और अनावश्यक बाधाओं से मुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी बताया गया है।
NTA को वैधानिक संस्था बनाने की सिफारिश
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रिपोर्ट में National Testing Agency (NTA) के मौजूदा ढांचे में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
SBI Research के मुताबिक NTA वर्तमान में एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में काम करती है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि संसद द्वारा कानून बनाकर इसे एक वैधानिक संस्था का दर्जा दिया जाए।
ऐसे बदलाव से एजेंसी की जवाबदेही और संस्थागत ढांचा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट में स्थायी विशेषज्ञों की व्यवस्था और परीक्षा संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच के लिए अलग तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
चीन के Gaokao मॉडल से सीखने की बात
रिपोर्ट में चीन की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा Gaokao का उदाहरण भी दिया गया है। इसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा के दौरान लॉजिस्टिक्स, आयोजन व्यवस्था और विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान जैसे क्षेत्रों से सीख लेने की बात कही गई है।
हालांकि किसी दूसरे देश के मॉडल को भारत में लागू करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों और मौजूदा परीक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
उच्च शिक्षा में बढ़ा संस्थानों और छात्रों का दायरा
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 तक देश में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़कर 64,756 हो गई थी। इनमें 4.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे थे।
रिपोर्ट में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी को भी शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में रेखांकित किया गया है।
उच्च शिक्षा के बजट को बढ़ाने की सिफारिश
SBI Research ने उच्च शिक्षा के लिए सरकारी खर्च को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में उच्च शिक्षा पर सरकारी खर्च कुल सरकारी व्यय का करीब 1.6 प्रतिशत था, जो बाद में घटकर लगभग 1 प्रतिशत रह गया।
रिपोर्ट में इसे बढ़ाकर कम से कम 1.5 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है, ताकि उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता और संसाधनों को भी मजबूत किया जा सके।
शिक्षकों की कमी और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर
रिपोर्ट में केंद्रीय वित्तपोषित प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को भी बड़ी चुनौती बताया गया है। इसके अनुसार करीब 34 प्रतिशत शिक्षकीय पद रिक्त हैं।
इसके साथ ही युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने हेतु व्यावसायिक और कौशल आधारित प्रशिक्षण के विस्तार की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
आने वाले समय में क्या बदल सकता है?
SBI Research की सिफारिशों में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर वित्तीय संसाधन, मजबूत परीक्षा प्रणाली, NTA के कानूनी ढांचे में बदलाव, छात्रों के अधिकारों पर अधिक जोर और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इन सुझावों पर अमल के लिए संबंधित नीतिगत और कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी। फिलहाल ये SBI Research की सिफारिशें हैं, न कि सरकार द्वारा घोषित या लागू किए जा चुके बदलाव।
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