हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास का आरंभ इस वर्ष 6 जुलाई 2025 (रविवार) से हो रहा है और इसका समापन 1 नवंबर 2025 को होगा. यह समय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. ‘चातुर्मास’ का अर्थ होता है चार महीने का विशेष धार्मिक काल. इसमें सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक महीने आते हैं. इन महीनों में देवता योग निद्रा में चले जाते हैं, और इसी काल में पूजा-पाठ, व्रत, तपस्या और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है.
शनि के वक्री होने से कुछ राशियों को मिलेगा लाभ
इस बार चातुर्मास में शनि वक्री अवस्था में होंगे, यानी उल्टी चाल चलेंगे. ज्योतिष के अनुसार जब शनि वक्री होते हैं तो कुछ राशियों पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिलता है. आइए जानते हैं दिल्ली के वैदिक ज्योतिष और वास्तु एक्सपर्ट आदित्य झा से किन राशियों की किस्मत इस बार चमक सकती है.
मेष राशि: इस राशि के जातकों के लिए व्यापार में नए अवसर सामने आ सकते हैं. पैसे से जुड़ा पुराना विवाद सुलझ सकता है. लव लाइफ या दांपत्य जीवन में भी मिठास आने के संकेत हैं.किसी नई इनकम सोर्स की शुरुआत हो सकती है.
कर्क राशि: काफी समय से चल रही स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में अब राहत मिलने की संभावना है. परिवार का साथ और सहयोग मिलेगा. जो लोग किसी काम में बार-बार असफल हो रहे थे, उन्हें अब सफलता मिल सकती है. घर में शुभ कार्य के योग भी बन सकते हैं.
मीन राशि: व्यवसाय में अचानक तेजी आएगी. जिन लोगों का रोजगार ठप पड़ा था, उन्हें काम के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे. जॉब की तलाश कर रहे लोगों को नई नौकरी का प्रस्ताव मिल सकता है. दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी.
कुंभ राशि: आप पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, लेकिन चातुर्मास के दौरान राहत मिलने के संकेत हैं. धन आगमन के अच्छे योग बन रहे हैं. मानसिक तनाव में कमी आएगी. कोई रुका हुआ प्रोजेक्ट या कर्ज चुकता हो सकता है.
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
चातुर्मास को ईश्वर का विश्राम काल कहा जाता है. इस दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं. इस समय यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों से परहेज़ किया जाता है.
क्या करें चातुर्मास में?
जप, तप, व्रत और भजन-कीर्तन करें, सात्विक भोजन करें, दान-पुण्य करें, किसी जरूरतमंद की मदद करें, आत्मचिंतन और संयम का पालन करें मान्यता है कि इस काल में किए गए धर्मकर्म पूरे वर्ष का पुण्य देते हैं.
चातुर्मास 2025 सिर्फ एक धार्मिक काल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है. यह चार महीने आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन लाने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं. विशेष रूप से जिन राशियों पर शनि का अनुकूल प्रभाव पड़ रहा है, उनके लिए यह समय और भी फलदायी हो सकता है. ऐसे में, इस शुभ काल का लाभ उठाएं और इसे ध्यान, साधना और सेवा से भरपूर बनाएं


