LIFESTYLE NEWS BHARAT ; बदलती जीवनशैली, जंक फूड की बढ़ती आदत और कम होती शारीरिक गतिविधियों का असर अब बच्चों की त्वचा पर भी दिखाई देने लगा है. कम उम्र में ही बच्चों को मुंहासे, रूखापन और त्वचा से जुड़ी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. प्राकृतिक और घरेलू उपाय से त्वचा की कैसे देखभाल और चमकदार रखा जाए इसके लिए हमने आयुष अधिकारी से बातचीत की.
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की जिला आयुष अधिकारी डॉ. इंदु शर्मा ने बताया कि घर में आसानी से उपलब्ध दही, मुल्तानी मिट्टी और अन्य प्राकृतिक चीजों का सही तरीके से उपयोग बच्चों की त्वचा और बालों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है.
दही से बेहतर प्राकृतिक क्लींजर नहीं आजकल लोग चेहरे की सफाई के लिए बाजार में मिलने वाले फेसवॉश और अन्य केमिकल युक्त उत्पादों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि प्राकृतिक चीजें त्वचा के लिए ज्यादा सुरक्षित होती हैं. उन्होंने बताया कि दही त्वचा के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक क्लींजर है. इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा की गहराई से सफाई होती है और त्वचा को प्राकृतिक नमी भी मिलती है.
दहीं में बेसन या मक्की का आटा मिलाकर करें इस्तेमाल‘दहींमें बेसन मिलाकर लगाने से ये एक प्रभावी फेस पैक की तरह काम करता है, जिससे त्वचा साफ और मुलायम बनती है. वहीं, दही में मक्की का आटा मिलाने से यह प्राकृतिक स्क्रब का काम करता है, जिससे त्वचा की मृत कोशिकाएं हटती हैं और चेहरा अधिक निखरा हुआ दिखाई देता है. इसके अलावा दही में थोड़ा सा नींबू मिलाकर लगाने से त्वचा की प्राकृतिक चमक बढ़ाने में भी मदद मिलती है.’
टीनएज में मुंहासों के लिए मुल्तानी मिट्टी कारगर
किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव के कारण बच्चों के चेहरे पर मुंहासे, फोड़े-फुंसी और पिंपल्स की समस्या आम हो जाती है. ऐसे में मुल्तानी मिट्टी का उपयोग एक सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है. मुल्तानी मिट्टी को पानी में भिगोकर उसका लेप तैयार कर चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाने और सूखने के बाद धोने से त्वचा को राहत मिलती है और मुंहासों की समस्या में भी कमी आ सकती है.’
बालों की देखभाल में भी फायदेमंद दही बालों के लिए भी एक अच्छा प्राकृतिक क्लींजर है. दही में नींबू या नारियल तेल मिलाकर बालों में लगाने से बाल मुलायम और चमकदार बनते हैं और डैंड्रफ की समस्या भी कम हो सकती है. इसके अलावा मुल्तानी मिट्टी का उपयोग भी बालों की सफाई और देखभाल के लिए किया जा सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार त्वचा की अच्छी सेहत केवल बाहरी देखभाल से ही नहीं बल्कि संतुलित खान-पान से भी जुड़ी होती है. बच्चों के आहार में गाजर, आंवला, सेब, संतरा और किन्नू जैसे विटामिन-सी से भरपूर फल शामिल करने चाहिए. इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और त्वचा भी स्वस्थ रहती है. डॉ. इंदु शर्मा के अनुसार ‘बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उनकी देखभाल में प्राकृतिक चीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए. यदि बच्चों को शुरू से ही संतुलित खान-पान, पर्याप्त पानी और प्राकृतिक त्वचा देखभाल की आदत डाली जाए तो त्वचा और बालों से जुड़ी कई समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.’
केमिकल उत्पादों से हो सकता है नुकसान
आयुष विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में केमिकल युक्त फेसवॉश और सौंदर्य उत्पादों का अत्यधिक उपयोग त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है. इससे त्वचा रूखी हो सकती है और कई बार एलर्जी या अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं.


