Thursday, April 16, 2026

अर्जुन अवार्ड विनर सलीमा टेटे कौन है ?

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झारखण्ड के खेल प्रेमी के लिए साल का दूसरा दिन खुशियों का सौगात लेकर आया। महिला हॉकी टीम की कप्तान और ओलंपियन सलीमा टेटे को अर्जुन अवॉर्ड देने की घोषणा हुई है।
दरअसल, क्रिकेट आइकॉन महेंद्र सिंह धोनी को झारखंड की आन-बान और शान कहा जाता है।लेकिन अब इसमें एक और नाम जुड़ गया है. महिला हॉकी इंडिया की कप्तान और ओलंपियन सलीमा टेटे ने भी राज्य के गौरव में चार चांद लगा दिए हैं।लंबे संघर्ष और हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

झारखंड के सिमडेगा की हैं सलीमा
सलीमा टेटे झारखंड के सिमडेगा जिले की निवासी हैं. उनका पैतृक गांव बड़की छापर है. उनके पिता का नाम सुलक्षण टेटे है और वे भी स्थानीय स्तर पर हॉकी खेलते रहे हैं. काफी संघर्षों के बाद सलीमा ने सिमडेगा से भारतीय हॉकी टीम तक सफर तय किया है. उनके इस संघर्ष में उनके परिवार वालों खूब साथ दिया.
इसी के बदौलत आज वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रही हैं. सलीमा टेटे को हॉकी में शानदार प्रदर्शन के लिए 2019 में अपॉइंटमेंट रांची रेल डिवीजन दिया गया था.

सलीमा सिमडेगा जिला के सदर प्रखंड के छोटे से गांव बड़कीछापर की रहने वाली हैं। वह बड़कीछापर व आसपास के गांवों में उबड़-खाबड़ मैदान में अपने पिता की अंगुली थामे हॉकी खेलने जाती थीं।
हाथ निर्मित बांस के स्टिक व बाल से हॉकी की शुरुआत करने वाली सलीमा ने ग्रामीण स्तर के टूर्नामेंट से अपनी शुरुआत की थी। राज्यस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र में चयन के बाद पहले झारखंड टीम से खेलते हुए इंडिया टीम तक पहुंचीं।

सलीमा ने साल 2014 में पहली बार झारखंड टीम, 2016 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।

साल 2018 में उन्हें जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी मिली।

2024 में भारतीय महिला हाकी टीम की कप्तान बनीं।

एक छोटे से गांव में खस्सी कप से पहली प्रतियोगिता खेलते हुए ओलिंपिक, विश्व कप, राष्ट्रमंडल, एशियन गेम्स, एशिया कप सहित विश्व की सभी हॉकी प्रतियोगिताओं में सलीमा भारत के लिए खेल चुकी हैं।

सलीमा का परिवार आज भी बड़कीछापर गांव में रहता है। जब 2021 में सलीमा ओलिंपिक के लिए चुनी गई थीं, तब उनके घर में टीवी भी नहीं था। उसके पिता सुलक्सन टेटे एवं भाई अनमोल लकड़ा अब भी खेतों में हल जोतते हैं। वे हाट में दुकान लगाने के साथ ही मनरेगा में भी मजदूरी करते थे।

सलीमा की चार बहनें हैं, जिनमें इलिसन, अनिमा, सुमंती एवं महिमा टेटे शामिल हैं। सलीमा की बहन महिमा भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी हैं।

सलीमा के पिता सुलक्सन टेटे ने बताया कि काफी संघर्ष के बाद सलीमा इस मुकाम तक पहुंची हैं। पूर्व में वह उनके साथ हॉकी मैदान जाती और हॉकी सीखती थीं। बाद में हॉकी सिमडेगा के वर्तमान अध्यक्ष मनोज कोनबेगी की पहल से सिमडेगा स्थित राज्यस्तरीय आवासीय प्रशिक्षण के लिए चयनित हुईं।

ओलंपिक के किया था शानदार प्रदर्शन
साल 2021 में ओलंपिक के दौरान शानदार प्रदर्शन के लिए रेलवे ने उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर OSD स्पोर्ट्स बना दिया है. रांची रेल डिवीजन के सीनियर डीसीएम निशांत कुमार ने बताया कि पूरे रांची रेल डिवीजन परिवार के लिए ये गौरव का क्षण है. इससे अन्य खिलाड़ियों को भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलेगी, हॉकी को मजबूती मिलेगी और नए खिलाड़ी हॉकी के तरफ आकर्षित होंगे.
राज्य की पहली लड़की जिसे मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष भोलानाथ सिंह ने भी इसपर ख़ुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा, “सलीमा राज्य की पहली बेटी हैं जिनका चयन अर्जुन अवॉर्ड के लिए किया गया है. पूरे राज्य के लिए ये गर्व की बात है. आज उस बेटी को सम्मान मिल रहा है जो यहीं खेली और निखरकर सामने आई. साथ ही राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेकर गई.”
वहीं, सलीमा के पिता के मुताबिक, गांव में लकड़ी की छड़ी लेकर भी लड़कियां प्रैक्टिस करती हैं. अभी भी टैलेंट यानी प्रतिभा की यहां कोई कमी नहीं है. केवल मौके जरूरत है, जिससे इन सभी लड़कियों की प्रतिभा निखरकर सामने आएगी.

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