Sunday, September 13, 2026

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि 23-24 जून को पीयूष गोयल से मिलेंगे, ताकि नए टैरिफ के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके.

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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए अगले हफ्ते नई दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर 23 और 24 जून को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरान वे केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है.

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को जानकारी दी कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 22 जून को भारत पहुंचेगा. उन्होंने बताया कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा उस ‘फ्रेमवर्क डील’ को अंतिम रूप देना है, जिस पर दोनों देशों के अधिकारी लंबे समय से चर्चा कर रहे हैं. इसके साथ ही, दोनों पक्ष एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे. इससे पहले जून की शुरुआत में भी अमेरिकी वार्ताकारों ने भारतीय अधिकारियों के साथ इस विषय पर गहन चर्चा की थी.

टैरिफ नियमों में बदलाव से बढ़ी चुनौतियां
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश इस समझौते के पहले चरण को अगले महीने तक लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद वहां का टैरिफ ढांचा बदल गया है. अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 फीसदी का एकसमान आयात शुल्क लागू कर दिया है, जो 24 जुलाई को खत्म हो रहा है.

इस बदलाव के कारण भारत को अपने पड़ोसी प्रतिस्पर्धी देशों (जैसे बांग्लादेश और श्रीलंका) की तुलना में जो विशेष टैरिफ छूट मिलने वाली थी, उसका गणित बदल गया है. ऐसे में दोनों देशों के लिए समझौते की शर्तों को दोबारा तय करना जरूरी हो गया है, ताकि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिल सके.

धारा 301 और व्यापारिक दबाव
इस बातचीत के बीच एक बड़ी चुनौती अमेरिका द्वारा शुरू की गई ‘धारा 301’ की जांच भी है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने मार्च में भारत सहित कई देशों के खिलाफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जबरन श्रम के आरोपों की जांच शुरू की थी. इसके तहत अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है. विशेषज्ञ इसे भारत पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं. इस प्रस्ताव पर 7 जुलाई को सुनवाई होनी है.

क्या कहते हैं व्यापारिक आंकड़े
वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. आयात बढ़ने के कारण भारत का व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है. इस परिदृश्य में, 23-24 जून की यह बैठक दोनों देशों के व्यापारिक हितों को संतुलित करने और नए विवादों को सुलझाने के लिए बेहद निर्णायक साबित होगी.

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