Friday, April 3, 2026

अमेरिका ने पेटेंट दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया, जेनेरिक को छूट मिली उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना और विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करना है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए आयातित ‘पेटेंट दवाओं’ पर 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने की घोषणा की है. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कदम के पीछे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भरता को मुख्य कारण बताया है.

राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक उद्घोषणा में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जिस तरह से अमेरिका में विदेशी दवाएं और उनके कच्चे माल (API) का आयात हो रहा है, वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन रक्षक दवाओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना युद्ध या किसी वैश्विक संकट के समय अमेरिका को कमजोर बना सकता है. यह फैसला ‘ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट’ की धारा 232 के तहत लिया गया है, जिसका उपयोग पहले स्टील और एल्युमीनियम पर शुल्क लगाने के लिए किया गया था.

किसे छूट मिली और किसे नहीं?
इस नए आदेश के अनुसार, अधिकांश पेटेंट दवाओं पर 100% का भारी-भरकम शुल्क लगेगा. हालांकि, कुछ विशेष श्रेणियों और देशों को इसमें राहत दी गई है:

  • जेनेरिक दवाएं: आम जनता को राहत देते हुए जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को फिलहाल इस टैरिफ से बाहर रखा गया है.
  • मित्र देश: यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड से आने वाली दवाओं पर केवल 15% शुल्क लगेगा.
  • विशेष उपचार: दुर्लभ बीमारियों की दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन और जीन थेरेपी को पूरी तरह छूट दी गई है.

भारत और चीन पर प्रभाव
भारत और चीन दुनिया में दवाओं के कच्चे माल (API) और जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े उत्पादक हैं. हालांकि जेनेरिक दवाओं को अभी छूट मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में इस टैरिफ का दायरा बढ़ा, तो भारतीय दवा उद्योग पर इसका गहरा असर पड़ सकता है. फिलहाल, यह फैसला उन बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रभावित करेगा जो अपनी पेटेंट दवाओं का निर्माण अमेरिका से बाहर करती हैं.

‘मेक इन अमेरिका’ पर जोर
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयत ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य केवल टैक्स वसूलना नहीं, बल्कि कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए मजबूर करना है. जो कंपनियां अपनी उत्पादन इकाइयों को अमेरिका में स्थानांतरित करने की प्रतिबद्धता जताएंगी, उन्हें शुरुआती 4 वर्षों के लिए 20% का कम टैरिफ देना होगा.

यह नई व्यवस्था 31 जुलाई, 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी. इस फैसले से वैश्विक फार्मा बाजार में बड़े बदलाव की उम्मीद है और आने वाले दिनों में दवाओं की कीमतों में अस्थिरता देखी जा सकती है.

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