Friday, February 13, 2026

अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब पूरा टोल नहीं लगेगा, 15 फरवरी से नए नियम लागू होंगे, जिससे यात्रियों को सामान्य हाईवे से कम शुल्क देना होगा.

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नई दिल्ली: भारत में एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. सरकार ने टोल टैक्स वसूलने के पुराने नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए ‘राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं वसूली) नियम, 2008’ में संशोधन को मंजूरी दे दी है. इस नए नियम के लागू होने के बाद, यात्रियों को अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरा टोल नहीं देना होगा.

क्या है नया नियम और क्यों मिली राहत?
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर चलने के लिए यात्रियों को सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में 25% अधिक टोल टैक्स देना पड़ता है. यह अतिरिक्त शुल्क इसलिए लिया जाता है क्योंकि एक्सप्रेसवे उच्च श्रेणी की सुविधाएं, सुरक्षा और तेज रफ्तार का अनुभव प्रदान करते हैं. समस्या तब आती थी जब कोई एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से खुला होता था, लेकिन यात्रियों से टोल पूरे खंड का और एक्सप्रेसवे की ऊंची दरों पर ही वसूला जाता था.

अब नए संशोधन के तहत, यदि कोई एक्सप्रेसवे अपनी पूरी लंबाई में तैयार नहीं है और केवल कुछ हिस्सों में ही शुरू हुआ है, तो वहां एक्सप्रेसवे वाली ऊंची दरें लागू नहीं होंगी. ऐसे मामलों में, टोल शुल्क को घटाकर सामान्य नेशनल हाईवे की दरों से भी कम कर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल यात्रियों के पैसे बचेंगे, बल्कि लोग एक्सप्रेसवे के खुले हुए हिस्सों का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

कब से लागू होंगे ये नियम?
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ये संशोधित नियम 15 फरवरी, 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे. हालांकि, यह राहत स्थायी नहीं होगी. यह नियम संशोधन लागू होने की तारीख से एक वर्ष की अवधि तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से चालू होने तक (दोनों में से जो भी पहले हो) मान्य रहेगा. जैसे ही एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो जाएगा, टोल दरें फिर से सामान्य एक्सप्रेसवे शुल्क के अनुसार ली जाने लगेंगी.

आम जनता पर क्या होगा असर?
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे या अन्य नए निर्माणाधीन रूटों पर यात्रा करते हैं. अक्सर देखा गया है कि निर्माण कार्य के कारण यात्रियों को जाम और खराब रास्तों का सामना करना पड़ता है, फिर भी उन्हें मोटा टोल देना पड़ता है. अब नए नियमों से उन्हें “जितना रास्ता, उतना पैसा” और “सुविधा के हिसाब से शुल्क” के सिद्धांत पर राहत मिलेगी.

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