Tuesday, June 9, 2026

EV स्टार्टअप कंपनी Blinq Mobility ने एक ऐसा कॉन्सेप्ट पेश किया है, जो कार की बैटरी स्वैप सिर्फ 3 मिनट में कर सकती है.

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  •  गुरुग्राम की EV स्टार्टअप कंपनी Blinq Mobility एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार बनाने पर काम कर रही है, जो भारत की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कारों में से एक हो सकती है. इसके साथ ही, कंपनी EV के मालिक होने से जुड़ी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक को दूर करने की कोशिश कर रही है, जोकि कार को चार्ज करने में लगने वाला समय है.

जानकारी के अनुसार, अल्ट्रा-फ़ास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहने के बजाय, कंपनी की आने वाली इलेक्ट्रिक कार बैटरी स्वैपिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाली है, जिससे तीन मिनट से भी कम समय में 250km से ज़्यादा की ड्राइविंग रेंज मिल सकेगी. Blinq Mobility के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ़ 2 मिनट 48 सेकंड का समय लगता है.

कंपनी ने बताया कैसे होगा ये प्रोसेस
Blinq Mobility ने हाल ही में अपने ऑफ़िशियल YouTube चैनल पर एक वीडियो के ज़रिए बैटरी स्वैपिंग प्रोसेस को प्रदर्शित किया. हालांकि इस कार के प्रोडक्शन मॉडल को अभी तक कोई आधिकारिक नाम नहीं दिया गया है, और फ़िलहाल इसे Car001 नाम दिया गया है, लेकिन यह प्रोटोटाइप प्रोडक्शन के काफ़ी करीब लगता है.

इसका कॉन्सेप्ट आसान है. बैटरी के चार्ज होने का इंतज़ार करने के बजाय, डिस्चार्ज हो चुके बैटरी पैक को हटाकर उसकी जगह एक पूरी तरह चार्ज यूनिट लगा दी जाती है. यह काम किसी ऑथराइज़्ड स्वैपिंग स्टेशन पर किया जाता है.

यह टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर में पहले से ही जानी-पहचानी है, लेकिन भारत में किसी इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार के लिए ऑटोमेटेड बैटरी स्वैपिंग लाने की यह शुरुआती कोशिशों में से एक होने वाली है.

कैसे होती है स्वैपिंग की प्रक्रिया
इस प्रक्रिया के लिए कार को एक खास बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पर ले जाना होता है, और एक खास रैंप पर खड़ा किया जाता है. इसके बाद, ड्राइवर सेंटर कंसोल में लगे रोटरी कंट्रोलर का इस्तेमाल करके खास ‘Swap’ या ‘S’ मोड चालू कर सकते हैं.

इसके चालू होने पर, ऑटोमैटिक क्लैंप कार के व्हील्स को पकड़ लेते हैं और फिर रोबोटिक इक्विपमेंट की मदद से बैटरी पैक को अलग करके निकाल लिया जाता है. इसके बाद, पूरी तरह चार्ज बैटरी को गाड़ी में लगाया जाता है और उसके इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जोड़ दिया जाता है.

कार में बैटरी के इंस्टॉलेशन के बाद, गाड़ी को वापस ज़मीन पर उतारने से पहले सिस्टम कई तरह की सुरक्षा जांच करता है. कंपनी द्वारा जारी डेमो वीडियो में, स्वैप पूरा होने के बाद इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर 100 प्रतिशत चार्ज दिखाता है और ड्राइविंग रेंज 252 km बताता है.

दिलचस्प बात यह है कि Blinq Mobility ने अभी तक बैटरी पैक की क्षमता के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, हालांकि वीडियो से पता चलता है कि यह काफ़ी कॉम्पैक्ट है. यह इलेक्ट्रिक कार एक खास स्केटबोर्ड प्लेटफ़ॉर्म पर बनी है.

चार्जिंग की चिंता हो सकती है खत्म
Blinq Mobility के इस प्रोग्राम को अगर बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, तो बैटरी स्वैपिंग सिस्टम इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े डाउनटाइम (गाड़ी के इस्तेमाल न हो पाने का समय) को काफी कम कर सकता है. इसके तहत, चार्जिंग स्टेशन पर 30 मिनट से लेकर कई घंटे बिताने के बजाय, यूज़र आसानी से बैटरी बदल सकते हैं और कुछ ही मिनटों में अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं.

हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस कॉन्सेप्ट की सफलता काफी हद तक स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी. फिलहाल, Blinq Mobility ने गुरुग्राम में ऐसी ही एक फेसेलिटी शुरू की है, और जैसे-जैसे यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, और भी स्टेशन खोले जाने की संभावना है.

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