Sunday, May 24, 2026

रांची में झारखंड कांग्रेस का राज्यस्तरीय शिकायत निवारण कार्यदिवस फीका रहा है.

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रांची: नई पीसीसी गठन और जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन को लेकर नाराजगी झेल रही झारखंड कांग्रेस में असंतोष को पार्टी प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए प्रभारी के राजू के निर्देश पर 24 मई को राज्यभर में ‘शिकायत निवारण कार्यदिवस’ मनाया गया. लेकिन रांची महानगर कांग्रेस में तो पूरी तरह सन्नाटा रहा.

रविवार को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक रांची कांग्रेस मुख्यालय में महानगर और ग्रामीण दोनों जिलों के कार्यालय खुले रहे. महानगर कांग्रेस के प्रभारी धर्मराज राम ने बताया कि उनके यहां एक भी लिखित शिकायत नहीं आई. हालांकि कुछ कार्यकर्ता शिकायत की जगह सलाह लेकर आए. इनमें SIR (संगठनात्मक रिपोर्ट) को लेकर सतर्कता बरतने, BLA को अधिक सक्रिय बनाने और बड़े नेताओं की जवाबदेही तय करने जैसी सुझाव शामिल थे.

  • ग्रामीण रांची कांग्रेस में पूर्व जिला महासचिव मो गुलजार अहमद ने प्रदेश प्रभारी के राजू के नाम एक बंद लिफाफे में शिकायत सौंपी. ग्रामीण रांची प्रभारी रियाजुल अंसारी को यह शिकायत दी गई.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि नई पीसीसी गठन के बाद विभिन्न क्षेत्रों से असंतोष की खबरें आ रही थीं. ऐसे में प्रभारी के. राजू का यह फैसला अच्छा है कि नाराज लोग इधर-उधर बयानबाजी करने के बजाय लिखित रूप में अपनी बात आलाकमान तक पहुंचाएं. केशव महतो कमलेश ने कहा, “कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है. सभी शिकायतों को एकत्र कर प्रदेश प्रभारी को सौंपा जाएगा, ताकि उचित कार्रवाई हो सके.”

प्रदेश महासचिव सुनीत शर्मा ने बताया कि शाम 5 बजे तक 21 जिलों से कुल 88 लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं. इनमें सबसे ज्यादा 25 शिकायतें धनबाद से आई हैं, जबकि गढ़वा और लातेहार जिले से एक भी शिकायत नहीं मिली. सभी जिलों की रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश प्रभारी के. राजू को सौंपी जाएगी.

क्यों पड़ा पड़ा शिकायत निवारण दिवस मनाने?

नई पीसीसी गठन के बाद झारखंड कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है. दो प्रदेश सचिवों जगदीश साहू व प्रशांत किशोर, कोऑर्डिनेशन कमिटी सदस्य सुरेंद्र सिंह समेत चार पदाधिकारियों के इस्तीफा और वित्तमंत्री की बगावत की आवाज के बाद पार्टी नेतृत्व को आंतरिक असंतोष को चैनलाइज करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा. हालांकि रांची जैसे बड़े जिले में शिकायतों की कमी ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या नाराज नेता अब भी लिखित शिकायत करने से कतराते हैं.

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